पन्ना: जिले के 60 से अधिक सरपंचों ने शासन-प्रशासन पर अपने अधिकारों के हनन का आरोप लगाते हुए जिला मुख्यालय पहुंचकर भाजपा जिलाध्यक्ष को भाजपा की सदस्यता से इस्तीफा देने के लिए पत्र सौंपा। साथ ही, जिला पंचायत सीईओ के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भी प्रस्तुत किया।
क्या है सरपंचों के आरोप?
सरपंच संघ के जिलाध्यक्ष संजू शुक्ला ने कहा कि वर्तमान कार्यकाल में सरपंचों के पास निर्णय लेने और फैसले करने का अधिकार नहीं बचा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में सरपंचों के अधिकारों का हनन किया जा रहा है, जिसके विरोध में इस्तीफे की पेशकश की गई है।
60 Sarpanchs resigned from BJP : 27 मार्च 2025 को, जिलेभर के सरपंचों ने भाजपा कार्यालय पहुंचकर जिलाध्यक्ष बृजेंद्र मिश्रा को ज्ञापन सौंपा। इसके बाद, जिला पंचायत कार्यालय पन्ना पहुंचकर भी ज्ञापन दिया गया। दोनों ज्ञापनों में अपनी सदस्यता से इस्तीफा देने की मांग की गई है।
ज्ञापन में शामिल है ये मांगे
ज्ञापन में कई महत्वपूर्ण मांगें शामिल थीं, जिनमें मनरेगा मजदूरी भुगतान प्रणाली को लेकर आपत्ति जताई गई। पहले नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम के तहत श्रमिकों की फोटो अपलोड करवाई जाती थी, फिर हेड काउंट किया जाता था। अब मजदूरी भुगतान आई-ब्लिंक प्रणाली से किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण श्रमिकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है और वे पलायन के लिए मजबूर हो रहे हैं।
पंचायत सुनवाई में कोई भूमिका नहीं
60 Sarpanchs resigned from BJP : सरपंचों ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में अनुदान राशि को शहरी क्षेत्रों के बराबर करने की भी मांग की, क्योंकि वर्तमान में आवास निर्माण सामग्री की लागत 2 लाख रुपये तक हो रही है। उन्होंने यह भी शिकायत की कि पंचायत स्तर पर जनसुनवाई में सरपंचों की भूमिका समाप्त कर दी गई है।
इसके अलावा, समग्र आईडी पोर्टल पर लगातार आ रही विसंगतियों के कारण नाम जोड़ने और हटाने में हो रही समस्याओं के समाधान की भी मांग की गई है। सरपंचों का कहना है कि इन मुद्दों का निराकरण नहीं किया जा रहा, जिससे वे शासन के खिलाफ आंदोलन करने को मजबूर हो रहे हैं।