Raipur News : 11 साल बाद मिला इंसाफ: पति के एक्सीडेंट डेथ क्लेम पर पत्नी के पक्ष में NCDRC का बड़ा फैसला

Raipur News : 11 साल बाद मिला इंसाफ: पति के एक्सीडेंट डेथ क्लेम पर पत्नी के पक्ष में NCDRC का बड़ा फैसला

Chhattisgarh Raipur News : रायपुर। संयुक्त बैंक खाते से जुड़े दुर्घटना बीमा दावे को लेकर राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि संयुक्त बैंक खाते से दुर्घटना बीमा का प्रीमियम जमा किया गया है, तो किसी एक खाताधारक की दुर्घटना में मृत्यु होने पर पूरी बीमा राशि का दावा किया जा सकता है। इसी आधार पर आयोग ने दुर्ग निवासी मीना बाई चेलिक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को 5 लाख रुपये की बीमा राशि सहित ब्याज, 50 हजार रुपये क्षतिपूर्ति और 5 हजार रुपये वाद व्यय का भुगतान करने का निर्देश दिया।

मामला वर्ष 2014 का है। भिलाई-तीन निवासी स्वर्गीय शंकर लाल चेलिक और उनकी पत्नी मीना बाई का जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में संयुक्त बचत खाता था। इसी खाते से लिबर्टी वीडियोकान जनरल इंश्योरेंस की ग्रुप पर्सनल एक्सीडेंट पॉलिसी के लिए 65 रुपये का प्रीमियम काटा गया था, जिसके तहत 5 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा कवर मिला हुआ था।

12 सितंबर 2014 को रायपुर में काम के दौरान गिरने से शंकर लाल चेलिक के सिर में गंभीर चोट लगी थी। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इसके बाद मीना बाई ने बीमा कंपनी के समक्ष क्लेम किया, लेकिन कंपनी ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि मृतक संयुक्त खाते के दूसरे खाताधारक थे, इसलिए वे बीमा लाभ के पात्र नहीं हैं।

बीमा दावा खारिज होने के बाद मीना बाई ने जिला उपभोक्ता आयोग का रुख किया। जिला आयोग ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए 5 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया। बाद में राज्य उपभोक्ता आयोग ने इस राशि को घटाकर 2.50 लाख रुपये कर दिया। इसके खिलाफ मीना बाई और बीमा कंपनी दोनों ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में अपील दायर की।

सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय आयोग ने कहा कि बीमा पॉलिसी में कहीं भी यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि बीमा सुरक्षा केवल मुख्य खाताधारक तक सीमित रहेगी या संयुक्त खाते के प्रत्येक खाताधारक के लिए अलग-अलग प्रीमियम देना आवश्यक होगा। ऐसी स्थिति में पॉलिसी की अस्पष्टता का लाभ उपभोक्ता को मिलना चाहिए। आयोग ने यह भी माना कि बैंक रिकॉर्ड में किसी तकनीकी त्रुटि का खामियाजा उपभोक्ता को नहीं भुगतना चाहिए।

इन्हीं आधारों पर आयोग ने राज्य उपभोक्ता आयोग का आदेश रद्द करते हुए जिला आयोग का फैसला बहाल कर दिया और बीमा कंपनी को मीना बाई चेलिक को 5 लाख रुपये की बीमा राशि, उस पर ब्याज, 50 हजार रुपये क्षतिपूर्ति और 5 हजार रुपये वाद व्यय का भुगतान करने का निर्देश दिया।


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