मुख्यमंत्री वृक्षारोपण योजना पर उठे सवाल, 8.75 लाख की लागत से लगाए पौधे सूखे, उजड़ गया हरित परिसर

मुख्यमंत्री वृक्षारोपण योजना पर उठे सवाल, 8.75 लाख की लागत से लगाए पौधे सूखे, उजड़ गया हरित परिसर

Chhattisgarh News: मोहला-मानपुर। जिले में पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना की जमीनी हकीकत चिंताजनक तस्वीर पेश कर रही है। अंबागढ़ चौकी विकासखंड के ग्राम पिपरखार में वर्ष 2022 में लाखों रुपये की लागत से किए गए पौधारोपण कार्य की अधिकांश पौधें देखरेख के अभाव में सूखकर नष्ट हो गए हैं। मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

पौने 9 लाख रुपये खर्च, लेकिन नहीं बच सके पौधे

जानकारी के अनुसार योजना के तहत करीब 8 लाख 75 हजार रुपये की लागत से बड़े क्षेत्र में पौधारोपण किया गया था। इसके अलावा पौधों की सुरक्षा के लिए घेराबंदी, पानी की व्यवस्था और अन्य आवश्यक निर्माण कार्य भी कराए गए थे। यदि पौधों की नियमित देखभाल होती तो तीन वर्षों में यह क्षेत्र हरियाली से आच्छादित हो सकता था, लेकिन लापरवाही के चलते अधिकांश पौधे सूखकर खत्म हो गए।

पानी और रखरखाव की व्यवस्था हुई फेल

स्थानीय लोगों का कहना है कि पौधारोपण के बाद रखरखाव पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। सिंचाई व्यवस्था भी समय के साथ पूरी तरह चौपट हो गई, जिसके कारण पौधों को पर्याप्त पानी नहीं मिल सका। परिणामस्वरूप लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद परियोजना अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो सकी और पूरा परिसर उजाड़ नजर आ रहा है।

ग्राम पंचायत ने भी मानी विफलता

इस परियोजना की कार्य एजेंसी स्थानीय ग्राम पंचायत थी। मौजूदा स्थिति को लेकर ग्राम पंचायत के सचिव ने भी स्वीकार किया है कि वृक्षारोपण कार्य सफल नहीं हो पाया। उन्होंने इस परियोजना को विफल बताते हुए अप्रत्यक्ष रूप से रखरखाव की कमी को इसकी बड़ी वजह माना।

अधिकारियों ने जवाब देने से किया किनारा

जब क्षेत्र की बदहाल स्थिति और सूख चुके पौधों को लेकर संबंधित अधिकारियों से सवाल किए गए तो स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका। आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों ने पौधारोपण स्थल की वास्तविक स्थिति पर प्रतिक्रिया देने के बजाय अन्य योजनाओं की उपलब्धियां गिनाकर मामले से पल्ला झाड़ने का प्रयास किया।

पर्यावरण संरक्षण के दावों पर सवाल

इस घटना ने पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण अभियानों की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी नियमित देखभाल और निगरानी भी जरूरी है। अन्यथा सरकारी योजनाएं कागजों तक सीमित रह जाती हैं और लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पाते।

जांच और जवाबदेही की मांग

मामले के सामने आने के बाद ग्रामीणों ने परियोजना की जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों तथा संबंधित एजेंसियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते निगरानी की जाती तो लाखों रुपये की लागत से तैयार की गई यह परियोजना आज पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बन सकती थी।


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