Pratappur Shrimad Bhagwat Katha प्रतापपुर | प्रतापपुर नगर इन दिनों धर्म, श्रद्धा और अध्यात्म की ऐसी त्रिवेणी में डूबा रहा, जिसने पूरे क्षेत्र को भक्ति के महासागर में सराबोर कर दिया। स्टेडियम ग्राउंड में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का समापन विधिवत हवन, पूर्णाहुति और विशाल भंडारे के साथ अत्यंत भव्य एवं भावपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। पूरे आयोजन के दौरान नगर हरि नाम संकीर्तन और श्रीकृष्ण भक्ति में लीन नजर आया।
श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन-पूजन द्वारा किया गया। यज्ञ वेदी में दी गई आहुतियों से वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। आयोजन स्थल पर श्रद्धालुओं के स्वागत हेतु पुष्पवर्षा की गई, जिससे संपूर्ण परिसर भक्तिमय हो गया। वृंदावन से पधारे कथा व्यास आचार्य सदानंद जी प्रतिदिन श्रीमद् भागवत कथा का भावपूर्ण, ओजस्वी एवं हृदयस्पर्शी वाचन हुआ।
आचार्य सदानंद जी ने श्रीमद् भागवत महापुराण की महिमा बताते हुए कहा कि यह ग्रंथ केवल कथा नहीं, बल्कि मानव जीवन को धर्म, सत्य, करुणा और भक्ति के मार्ग पर ले जाने वाली दिव्य जीवन-दृष्टि है। कथा के दौरान भागवत महात्म्य, शुकदेव-परिक्षित संवाद, भक्त प्रह्लाद, ध्रुव चरित्र, वामन अवतार, गोवर्धन लीला, महारास, रुक्मणी विवाह और सुदामा चरित्र जैसे प्रसंगों का सजीव और भावनात्मक वर्णन किया गया।
कथा के दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर होकर “हरि बोल” और “नारायण-नारायण” के जयघोष करते नजर आए। विशेष आकर्षण का केंद्र कंस के कारागार में श्रीकृष्ण जन्म की मनोहारी झांकी रही। झांकी प्रस्तुत होते ही पूरा पंडाल जयकारों से गूंज उठा और श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन, नृत्य एवं पुष्पवर्षा के साथ जन्मोत्सव का उल्लास मनाया। उस क्षण ऐसा प्रतीत हुआ मानो स्वयं भगवान श्रीकृष्ण भक्तों के मध्य विराजमान हों।
कथा के अंतिम दिनों में आचार्य सदानंद जी ने वैराग्य, भक्ति और कर्म के संतुलन पर प्रवचन देते हुए कहा कि सच्ची भक्ति वही है, जो मानव को सदाचार, सेवा और संयम के मार्ग पर अग्रसर करे। उनके प्रवचनों ने श्रोताओं को आत्मचिंतन और आत्मशुद्धि के लिए प्रेरित किया।
समापन दिवस पर विधिवत हवन एवं पूर्णाहुति संपन्न हुई। वैदिक मंत्रों के साथ दी गई आहुतियों से संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो गया। इसके पश्चात आयोजित विशाल भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। सेवा, समर्पण और समरसता की भावना से ओत-प्रोत यह भंडारा आयोजन की पूर्णता का प्रतीक बना।
सात दिनों तक चले इस आयोजन में हर वर्ग और हर आयु के श्रद्धालु भक्ति में एकसाथ डूबे नजर आए। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना का भी सशक्त संदेश देकर गया। श्रीमद् भागवत कथा का यह आयोजन प्रतापपुर के धार्मिक इतिहास में एक अविस्मरणीय और स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है।

