MP Wheat Scam: ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर-चंबल अंचल में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं खरीदी में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कई जगहों पर फर्जी किसानों के नाम पर सरकारी रिकॉर्ड में गेहूं की खरीदी दिखाकर सरकारी राशि का भुगतान किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए भिंड और मुरैना जिले की 19 सहकारी समितियों के प्रबंधकों और कंप्यूटर ऑपरेटरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। शुरुआती जांच में करोड़ों रुपये के घोटाले की आशंका जताई जा रही है।
बिना फसल और बिना जानकारी के बेच दिया ‘कागजी’ गेहूं
जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि कई किसानों की जमीन पर या तो गेहूं की फसल थी ही नहीं, या फिर किसानों को इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि उनके नाम पर सरकारी रिकॉर्ड में गेहूं बेच दिया गया है। आरोप है कि सहकारी समितियों में बैठे जिम्मेदार लोगों ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर किसानों के नाम पर समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी दर्शाई और सरकारी भुगतान की प्रक्रिया पूरी कर दी। इस पूरे फर्जीवाड़े ने खरीदी व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मुरैना में 20 लोगों पर मामला दर्ज, 15 पटवारी निलंबित
मुरैना जिले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 10 सहकारी समितियों के 10 प्रबंधकों और 10 कंप्यूटर ऑपरेटरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। राजस्व विभाग की प्रारंभिक जांच में हल्का पटवारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई, जिसके बाद 15 पटवारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
इसके अलावा मामले में लापरवाही सामने आने पर दो तहसीलदारों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।
भिंड में भी जांच तेज, बैंक खातों की राशि कराई गई होल्ड
भिंड जिले के लहार, रौंन और मिहोना क्षेत्र की नौ सहकारी समितियां भी जांच के घेरे में हैं। शुरुआती जांच में 23 फर्जी किसानों के नाम सामने आने के बाद कलेक्टर के.एल. मीणा ने जांच रिपोर्ट पर असंतोष जताते हुए विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं।
जिन बैंक खातों में फर्जी तरीके से सरकारी राशि ट्रांसफर की गई थी, प्रशासन ने उन खातों में मौजूद रकम को तत्काल प्रभाव से होल्ड (फ्रीज) करवा दिया है ताकि राशि की निकासी न हो सके। साथ ही आरोपी समिति प्रबंधकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए जिला सहकारी बैंक को भी पत्र भेजा गया है।
सरकारी रिकॉर्ड और बैंक लेनदेन की होगी गहन जांच
प्रशासन अब गेहूं खरीदी से जुड़े सभी रिकॉर्ड, किसानों के पंजीयन, भूमि विवरण, बैंक खातों और भुगतान संबंधी दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रहा है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस फर्जीवाड़े में किन अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य लोगों की भूमिका रही है। यदि जांच में और नाम सामने आते हैं तो उनके खिलाफ भी आपराधिक और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद सख्त कार्रवाई
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद प्रशासन ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए तेजी से कार्रवाई शुरू की है। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी योजनाओं में गड़बड़ी और किसानों के नाम पर फर्जी भुगतान करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सरकारी धन की वसूली की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।
करोड़ों रुपये के घोटाले की आशंका
हालांकि अभी तक घोटाले की अंतिम राशि सामने नहीं आई है, लेकिन प्रारंभिक जांच के आधार पर यह मामला करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े का माना जा रहा है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस घोटाले का दायरा और बढ़ सकता है। प्रशासन का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाएगा।

