दुर्ग में अवैध कोयला कारोबार का बड़ा भंडाफोड़: फर्जी GST बिलों के सहारे खपाया जा रहा था चोरी का कोयला, तीन गिरफ्तार

दुर्ग में अवैध कोयला कारोबार का बड़ा भंडाफोड़: फर्जी GST बिलों के सहारे खपाया जा रहा था चोरी का कोयला, तीन गिरफ्तार

Chhattisgarh Durg News: दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में पुलिस ने अवैध कोयला कारोबार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक ऐसे संगठित नेटवर्क का खुलासा किया है, जो फर्जी जीएसटी बिलों के सहारे कथित तौर पर चोरी के कोयले को वैध बताकर बाजार में खपा रहा था। खुर्सीपार क्षेत्र में हुई इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 15.530 टन से अधिक कोयला जब्त किया है और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह अवैध कारोबार पिछले कई महीनों से संचालित किया जा रहा था।

मुखबिर की सूचना पर हुई कार्रवाई

पुलिस को सूचना मिली थी कि खुर्सीपार गेट के समीप स्थित एक कोयला डिपो में बड़ी मात्रा में अवैध कोयला संग्रहित कर उसकी बिक्री की जा रही है। सूचना के आधार पर थाना खुर्सीपार पुलिस और एसीसीयू की संयुक्त टीम ने मौके पर छापेमारी की।

कार्रवाई के दौरान डिपो संचालक विजय कुमार केसरवानी के कब्जे से लगभग 15.530 टन कोयला, कांटा-तराजू तथा परिवहन और खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए। जब पुलिस ने कोयले के संबंध में पूछताछ की तो आरोपी ने जीएसटी बिल और परिवहन दस्तावेज प्रस्तुत कर माल को वैध साबित करने का प्रयास किया।

दस्तावेजों की जांच में सामने आई सच्चाई

शुरुआती जांच में कागजात सामान्य प्रतीत हुए, लेकिन पुलिस को कुछ विसंगतियां दिखाई दीं। इसके बाद दस्तावेजों की गहन जांच शुरू की गई। जीएसटी विभाग से सत्यापन कराया गया और जिन वाहनों के माध्यम से कोयला परिवहन किए जाने का दावा किया गया था, उनके आवागमन की भी जांच की गई।

डीएसपी यदुमनी सिदार के अनुसार, जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जीएसटी बिलों में जिन वाहनों का उल्लेख था, वे संबंधित मार्गों से गुजरे ही नहीं थे। टोल प्लाजा के रिकॉर्ड खंगालने पर यह स्पष्ट हो गया कि कोयले के परिवहन से जुड़े दस्तावेज फर्जी थे और पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की जा रही थी।

चोरी के कोयले को वैध बनाने का खेल

जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी छोटे-छोटे स्रोतों से बोरी, थैलों और बैगों में लाया गया कोयला खरीदते थे। बाद में उसे एक स्थान पर एकत्र कर बड़े पैमाने पर बिक्री की जाती थी। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि यह कोयला चोरी का हो सकता है।

पुलिस अब कोयले के वास्तविक स्रोत और सप्लाई चेन की विस्तृत पड़ताल कर रही है। इस संबंध में भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) के अधिकारियों से भी जानकारी मांगी गई है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कोयला कहां से लाया जा रहा था।

फर्जी GST बिल बनाने वाला नेटवर्क बेनकाब

विवेचना के दौरान पुलिस को मोबाइल कॉल डिटेल, डिजिटल ट्रांजेक्शन और वित्तीय लेनदेन से जुड़े कई महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले। जांच में यह सामने आया कि फर्जी जीएसटी बिल तैयार करने और उपलब्ध कराने में राजकुमार मिश्रा और सुनील शर्मा की अहम भूमिका थी।

पुलिस के अनुसार दोनों आरोपी कमीशन के आधार पर फर्जी बिल उपलब्ध कराते थे। बताया जा रहा है कि प्रत्येक लेनदेन पर उन्हें 5 से 10 प्रतिशत तक कमीशन मिलता था। पर्याप्त सबूत मिलने के बाद दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और बाद में गिरफ्तार कर लिया गया।

तीन से चार महीने से चल रहा था कारोबार

पुलिस जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर यह अवैध कारोबार पिछले तीन से चार महीनों से संचालित किया जा रहा था। मुख्य आरोपी विजय कुमार केसरवानी लगभग एक दशक से कोयला व्यापार से जुड़ा हुआ है।

हालांकि फर्जी दस्तावेजों के उपयोग और अवैध कारोबार में संलिप्तता के आरोप सामने आने के बाद उसके पूरे कारोबार की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उसके खिलाफ पूर्व में मारपीट का एक मामला भी दर्ज हो चुका है।

तीन आरोपी गिरफ्तार, लाखों का माल जब्त

पुलिस ने इस मामले में विजय कुमार केसरवानी (48 वर्ष), राजकुमार मिश्रा (46 वर्ष) और सुनील शर्मा (50 वर्ष) को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के खिलाफ थाना खुर्सीपार में अपराध क्रमांक 208/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

कार्रवाई के दौरान तीन लाख रुपये से अधिक मूल्य का कोयला, तीन मोबाइल फोन तथा परिवहन में उपयोग किए गए वाहन को जब्त किया गया है।

बड़े नेटवर्क की तलाश में जुटी पुलिस

दुर्ग पुलिस का मानना है कि यह केवल शुरुआती कार्रवाई है। फर्जी जीएसटी बिलों के जरिए चोरी के माल को वैध बनाकर बाजार में खपाने वाले बड़े नेटवर्क की जांच जारी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस अवैध कारोबार में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा इसके तार किन-किन जिलों और राज्यों तक जुड़े हुए हैं।

जांच एजेंसियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर भेजने की प्रक्रिया जारी है, जबकि पुलिस पूरे नेटवर्क की परत-दर-परत जांच में जुटी हुई है।


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