Jagdalpur News : झीरम घाटी हमले पर NIA कोर्ट का फैसला, 27 लोगों की हत्या और हत्या के प्रयास में 10 दोषी

Jagdalpur News : झीरम घाटी हमले पर NIA कोर्ट का फैसला, 27 लोगों की हत्या और हत्या के प्रयास में 10 दोषी

Chhattisgarh Jagdalpur News : जगदलपुर। झीरम घाटी नक्सली हमला मामले में 5 सितंबर शनिवार को जगदलपुर स्थित NIA की विशेष अदालत ने फैसला सुनाया। इस मामले में 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई चली थी, जिनमें से एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है। अब कोर्ट ने मामले में बचे सभी 10 आरोपियों को सभी धाराओं में दोषी करार दिया है। आरोपियों को 16 सितंबर को सजा सुनाई जाएगी।

कोर्ट ने मामले में सभी 10 आरोपियों को 27 लोगों की हत्या और 15 लोगों की हत्या के प्रयास से जुड़ी धाराओं में दोषी पाया है। दोषी करार दिए गए आरोपियों में ज्योति उर्फ प्रमिला कोड़ियम, बंजामी उर्फ सन्ना, अयाता मरकाम, मुक्का मंडावी, मड़कामी, देवा कवासी, कोसा चैतू उर्फ मुन्ना, कोसा कवासी, महादेव नाग और सुमित्रा शामिल हैं। इस मामले में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया था, लेकिन एक आरोपी की मृत्यु हो चुकी है।

बचाव पक्ष के अधिवक्ता अरविंद चौधरी ने बताया कि NIA की विशेष अदालत ने सभी 10 आरोपियों को दोषी माना है। उन्होंने कहा कि आरोपियों को सजा सुनाने के लिए 16 सितंबर की तारीख तय की गई है। बचाव पक्ष ने अदालत के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात भी कही है।

झीरम घाटी हमला 25 मई 2013 को हुआ था। उस समय छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने थे और तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार सत्ता में थी। कांग्रेस ने चुनाव के मद्देनजर पूरे प्रदेश में परिवर्तन यात्रा शुरू की थी। 25 मई को सुकमा में परिवर्तन रैली के बाद कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का काफिला सुकमा से जगदलपुर की ओर रवाना हुआ था। काफिले में करीब 25 वाहन और लगभग 200 नेता-कार्यकर्ता शामिल थे।

काफिले में सबसे आगे तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल और कवासी लखमा की गाड़ियां थीं। इनके पीछे महेंद्र कर्मा और मलकीत सिंह गैदू का वाहन चल रहा था, जबकि बस्तर कांग्रेस के प्रभारी उदय मुदलियार भी काफिले में शामिल थे। इस तरह कांग्रेस की प्रदेश और बस्तर की प्रमुख राजनीतिक नेतृत्व इस काफिले का हिस्सा था।

दोपहर करीब 3:40 बजे काफिला झीरम घाटी पहुंचा। आरोप है कि नक्सलियों ने पेड़ गिराकर रास्ता बंद कर दिया था। जैसे ही वाहनों का काफिला रुका, बड़ी संख्या में नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी। हमले में नंदकुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश पटेल समेत कई लोगों की मौत हुई। बताया जाता है कि करीब डेढ़ घंटे तक गोलीबारी चली।

इसके बाद शाम करीब 5:30 बजे नक्सली पहाड़ियों से नीचे आए और एक-एक वाहन की तलाशी लेने लगे। इसी दौरान उन्हें सलवा जुडूम आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल महेंद्र कर्मा मिले। सलवा जुडूम आंदोलन के कारण नक्सली उन्हें अपना प्रमुख दुश्मन मानते थे। हमलावरों ने महेंद्र कर्मा की हत्या कर दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नक्सलियों ने कुछ नेताओं की पहचान नाम लेकर की और उन्हें निशाना बनाया।

झीरम घाटी का यह हमला छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े राजनीतिक और नक्सली हमलों में गिना जाता है। हमले में कांग्रेस की तत्कालीन प्रदेश नेतृत्व की एक बड़ी संख्या को निशाना बनाया गया था। घटना के बाद मामले की जांच विभिन्न स्तरों पर हुई और अंततः NIA की विशेष अदालत में आरोपियों के खिलाफ सुनवाई चली। अब अदालत ने मामले में बचे सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है और 16 सितंबर को सजा सुनाई जाएगी।


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