Indore Ger Rangpanchami 2026: इंदौर: मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर केवल देश का सबसे स्वच्छ शहर ही नहीं, बल्कि अपनी समृद्ध परंपराओं और अनोखी सांस्कृतिक विरासत के लिए भी विश्वभर में प्रसिद्ध है. इन्हीं परंपराओं में से एक है इंदौर की ऐतिहासिक रंगपंचमी ‘गेर’, जिसे देखने हर साल देश-विदेश से लाखों लोग शहर पहुंचते हैं. होली के पांच दिन बाद निकलने वाली यह रंग यात्रा आज दुनिया की सबसे अनोखी और सबसे बड़ी गेर मानी जाती है.
होलकरकाल की परंपरा; जब हाथी, घोड़े और ऊंट पर निकलती थी रंगयात्रा
दरअसल, इस परंपरा की शुरुआत होलकरकाल में हुई थी. उस समय राजा-महाराजा और आमजन हाथी, घोड़े, बैल और ऊंट पर सवार होकर शहर में रंग-गुलाल उड़ाते हुए जुलूस निकालते थे. राजवाड़ा इस उत्सव का केंद्र हुआ करता था और समय के साथ यह शाही परंपरा पूरे शहर का जनोत्सव बन गई.
1948 में शुरू हुई आधुनिक गेर; 500 लोगों से लाखों तक पहुंचा कारवां
आधुनिक गेर की शुरुआत साल 1948 में टोरी कॉर्नर के बाबूलाल गिरी ने की थी. उस समय इस आयोजन में करीब 500 से 700 लोग शामिल होते थे. तब बड़े टैंकर या गुलाल उड़ाने की मशीनें नहीं थीं, सिर्फ रंग और उत्साह था. आज यही परंपरा गिरी परिवार की तीसरी पीढ़ी आगे बढ़ा रही है. पशुओं के उपयोग पर रोक लगने के बाद अब गेर में हाईटेक मशीनें, कलर ब्लोअर और बड़े टैंकरों का इस्तेमाल किया जाता है.
रंगपंचमी के दिन राजवाड़ा का नजारा बेहद खास होता है. रंग-गुलाल के बादल, पानी की बौछारें, फूलों की बारिश और हजारों लोगों की भीड़ पूरे शहर को रंगों में सराबोर कर देती है. इस साल भी गेर में करीब पांच लाख से ज्यादा लोगों के शामिल होने की संभावना है, जिनमें बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भी आते हैं.
यूनेस्को रिकॉर्ड दर्ज कराने की तैयारी, प्रशासन पूरी तरह सतर्क
इंदौर प्रशासन इस ऐतिहासिक गेर को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने और यूनेस्को सूची में दर्ज कराने की दिशा में प्रयास कर रहा है. कलेक्टर शिवम वर्मा के अनुसार आयोजन के लिए विशेष गाइडलाइन जारी की गई है. चेहरे पर मास्क पहनने और सीटी या विसल बजाने पर प्रतिबंध रहेगा. डीजे और साउंड सिस्टम तय सीमा में चलेंगे. महिलाओं की सुरक्षा के लिए विशेष महिला टास्क फोर्स तैनात की गई है, वहीं करीब 4000 पुलिसकर्मी सुरक्षा व्यवस्था संभालेंगे. पूरे आयोजन की निगरानी सीसीटीवी कैमरों से की जाएगी.
तीन पीढ़ियों की परंपरा; गिरी परिवार का योगदान
इंदौर की गेर को जीवित रखने में गिरी परिवार की अहम भूमिका रही है. आयोजक शेखर गिरी बताते हैं कि उनके दादा बाबूलाल गिरी ने इस परंपरा को संगठित रूप दिया था और आज यह इंदौर की पहचान बन चुकी है.
इंदौर की गेर एशिया की सबसे बड़ी रंग यात्रा मानी जाती है, जिसका 76 वर्षों का इतिहास है. लाखों लोगों की भागीदारी, हाईटेक गुलाल मशीनों का इस्तेमाल और परंपरा व आधुनिकता का अनूठा संगम इसे खास बनाता है. यही वजह है कि इंदौर की गेर सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि शहर की पहचान और सांस्कृतिक धरोहर बन चुकी है.

