आरटीई सीटों में भारी कटौती पर हाईकोर्ट नाराज, 85 हजार से 30 हजार करने पर सरकार से जवाब मांगा

आरटीई सीटों में भारी कटौती पर हाईकोर्ट नाराज, 85 हजार से 30 हजार करने पर सरकार से जवाब मांगा

RTE Seats Cut High Court News बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने राज्य में आरटीई के तहत आरक्षित सीटों की संख्या में भारी कटौती पर कड़ी नाराजगी जताई है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की पीठ ने सवाल उठाते हुए कहा कि चालू शिक्षा सत्र में आरटीई की सीटें 85 हजार से घटाकर सीधे 30 हजार कैसे कर दी गईं। इस मामले में अदालत ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव से व्यक्तिगत हलफनामा प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 24 मार्च को निर्धारित की गई है।

बुधवार को हाईकोर्ट में आरटीई से जुड़ी जनहित याचिका और स्कूल शिक्षा विभाग की व्यवस्थाओं से संबंधित अन्य याचिकाओं पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सूरजपुर जिले के तिलसिवा स्थित डीएवी मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल में बच्चों से पुताई और मजदूरी कराने के मामले पर भी चर्चा हुई। अदालत के निर्देश पर राज्य शासन की ओर से शपथ पत्र पेश किया गया, जिसमें बताया गया कि स्कूल की प्राचार्या विधु शर्मा को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया गया है और उनकी जगह सुनील महाजन को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

शासन द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में बताया गया कि जांच के दौरान पाया गया कि प्राचार्या का व्यवहार अभिभावकों के प्रति काफी रूखा और सख्त था। साथ ही यह भी सामने आया कि वे बिना किसी आधिकारिक अनुमति के स्कूल परिसर में ही रह रही थीं और उनके पति का भी वहां आना-जाना लगा रहता था।

सुनवाई के दौरान आरटीई से जुड़ी शिकायतों के निराकरण में लापरवाही का मामला भी सामने आया। जानकारी दी गई कि दुर्ग जिले में आरटीई से संबंधित 172 ऑफलाइन शिकायतों में से केवल 54 का ही निराकरण हुआ है, जबकि 118 शिकायतें अभी लंबित हैं। इस पर हाईकोर्ट ने दुर्ग के जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिया कि सभी लंबित मामलों का दो सप्ताह के भीतर निपटारा किया जाए।

इसके अलावा रायपुर के एक निजी स्कूल द्वारा बिना आवश्यक मान्यता के प्रवेश विज्ञापन जारी करने के मामले में हाईकोर्ट ने उसे नया पक्षकार बनाते हुए नोटिस जारी किया है। अदालत में एक अन्य याचिका पर भी चर्चा हुई, जिसमें राज्य सरकार के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें आरटीई के तहत 25 प्रतिशत आरक्षण को केवल कक्षा पहली तक सीमित कर दिया गया है और नर्सरी व केजी कक्षाओं को इससे बाहर रखा गया है। याचिकाकर्ता ने इसे कानून के विपरीत बताते हुए कहा कि राजस्थान हाईकोर्ट पहले ही ऐसे प्रतिबंध को असंवैधानिक ठहरा चुका है।


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