Bhupesh Baghel Lucknow Visit: लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कांग्रेस ने 11 अप्रैल को समाज सुधारक ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती को “वैज्ञानिक जाति जनगणना दिवस” के रूप में मनाया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
कार्यक्रम में भूपेश बघेल ने SIR (Special Intensive Revision) को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि इस प्रक्रिया से न तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संतुष्ट हैं और न ही विपक्ष के नेता अखिलेश यादव। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब सरकार में बैठे लोग ही इससे संतुष्ट नहीं हैं, तो विपक्ष के कहने का कोई मतलब नहीं रह जाता।
भूपेश बघेल ने ज्योतिबा फुले के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने महिलाओं की शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य किया और समाज में समानता की नींव रखी।
कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव के. राजू ने कहा कि बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की सोच की जड़ें महात्मा फुले के विचारों में हैं। उन्होंने लोगों से फुले की पुस्तकों को पढ़ने का आह्वान करते हुए कहा कि शिक्षा ही समाज में बदलाव का सबसे बड़ा माध्यम है।
वहीं कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि ज्योतिबा फुले ने 200 साल पहले ही महिलाओं और बेटियों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि उस दौर में जब महिलाओं को शिक्षा का अधिकार नहीं था, तब फुले ने अपनी पत्नी को शिक्षित कर देश की पहली महिला शिक्षिका बनाया।
आराधना मिश्रा ने आगे कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से समानता और न्याय की विचारधारा को आगे बढ़ाती रही है। उन्होंने महात्मा गांधी, बाबा साहब अंबेडकर और राहुल गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी ने संविधान और अपनी नीतियों में समानता को प्राथमिकता दी है।
उन्होंने यह भी कहा कि देश में महिला सशक्तिकरण का उदाहरण इंदिरा गांधी के रूप में सामने आया, जो देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं।
कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेताओं ने जातिगत जनगणना की मांग को भी जोरदार तरीके से उठाया और इसे सामाजिक न्याय के लिए आवश्यक बताया।

