छत्तीसगढ़ में पहली बार 8 वर्षीय बच्ची पर सफलतापूर्वक हुई दुर्लभ ट्रिपल कार्डियक प्रक्रिया, एमएमआई नारायणा हॉस्पिटल की बड़ी उपलब्धि

छत्तीसगढ़ में पहली बार 8 वर्षीय बच्ची पर सफलतापूर्वक हुई दुर्लभ ट्रिपल कार्डियक प्रक्रिया, एमएमआई नारायणा हॉस्पिटल की बड़ी उपलब्धि

Chhattisgarh News: रायपुर: एमएमआई नारायणा हॉस्पिटल की चिकित्सा टीम ने एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए 8 वर्षीय बच्ची पर दुर्लभ ट्रिपल इंटरवेंशनल कार्डियक प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की। यह छत्तीसगढ़ और मध्य भारत का पहला मामला माना जा रहा है।

बच्ची का वजन मात्र 18 किलोग्राम था और उसकी पहचान अस्पताल के स्वास्थ्य शिविर के दौरान हुई। जांच में पता चला कि बच्ची गंभीर पल्मोनरी स्टेनोसिस, एट्रियल सेष्टल डिफेक्ट (ASD) और जन्मजात कम्प्लीट हार्ट ब्लॉक (CHB) जैसी जटिल हृदय समस्याओं से पीड़ित थी।

चिकित्सकों ने चरणबद्ध तरीके से तीन प्रमुख प्रक्रियाएं कीं-बैलून वॉल्वुलोप्लास्टी द्वारा संकरे वाल्व को खोलना, ASD को डिवाइस के माध्यम से बंद करना और स्थायी पेसमेकर प्रत्यारोपण। इस जटिल प्रक्रिया में डिवाइस क्लोजर के बाद पेसमेकर लगाना सबसे बड़ी चुनौती थी।

डॉ. किंजल, सीनियर कंसल्टेंट पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी ने वॉल्वुलोप्लास्टी और डिवाइस क्लोजर की जिम्मेदारी संभाली। अगले दिन डॉ. सुमन्ता शेखर पाढ़ी ने पेसमेकर प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक किया, जिसमें सिंगल चैंबर कंडक्शन सिस्टम पेसिंग तकनीक का उपयोग किया गया।

एनेस्थीसिया टीम के डॉ. अरुण अंडप्पन और डॉ. प्रशांत ने भी इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सभी तीनों प्रक्रियाएं बिना किसी जटिलता के पूरी हुईं और बच्ची को मात्र तीन दिनों में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

एमएमआई नारायणा हॉस्पिटल के फैसिलिटी डायरेक्टर अजीत बेल्लमकोंडा ने कहा, “यह उपलब्धि अस्पताल की प्रतिबद्धता और मल्टीडिसिप्लिनरी टीमवर्क का प्रमाण है। समय पर पहचान और उन्नत कार्डियक केयर जीवनरक्षक साबित होती है।”

यह सफलता न केवल अस्पताल की उन्नत पीडियाट्रिक कार्डियक क्षमताओं को दर्शाती है, बल्कि जटिल जन्मजात हृदय रोगों में समय पर निदान और उपचार की अहमियत को भी रेखांकित करती है।


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