उतई। राज्य सरकार द्वारा जमीन के सरकारी दरों में लगातार किए जा रहे फेरबदल से परमालकसा–खरसिया रेलवे लाइन से प्रभावित किसान गहरी चिंता में हैं। दुर्ग जिले के ग्राम पुरई में रेलवे परियोजना से प्रभावित किसानों ने एक बैठक आयोजित कर भूमि मूल्यांकन, मुआवजा और आजीविका से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा की।
बैठक में किसानों ने बताया कि हाल के दिनों में समाचार पत्रों के माध्यम से वर्ष 2025–26 की नई गाइडलाइन दरों और भूमि मूल्यांकन प्रक्रिया में संभावित बदलाव की जानकारी सामने आई है, जिससे प्रभावित किसान मुआवजे को लेकर भ्रम और असमंजस में हैं। किसानों का कहना है कि सरकारी दरों में बार-बार परिवर्तन से भूमि का वास्तविक मूल्य घटने की आशंका बढ़ गई है।
किसानों ने बताया कि दुर्ग जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े किसानों द्वारा इस संबंध में जिला पंजीयक दुर्ग, महानिरीक्षक राजस्व रायपुर, सेंट्रल बोर्ड, जिला कलेक्टर, दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर, दुर्ग लोकसभा सांसद विजय बघेल, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, सचिवालय एवं वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी को लगभग 400 से 500 व्यक्तिगत और सामूहिक आवेदन भेजे जा चुके हैं। बावजूद इसके अब तक न तो कोई ठोस जवाब मिला है और न ही समस्याओं का समाधान हुआ है।
बैठक में किसानों ने भूमि मूल्यांकन को लेकर कई गंभीर आशंकाएं व्यक्त कीं। किसानों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि का मूल्यांकन यदि वर्गमीटर की बजाय हेक्टेयर दर से किया गया, तो छोटे भू-खंड वाले किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। इसके अलावा कुआं, बोर, ट्यूबवेल, बाड़ी, फलदार वृक्ष, मकान, बाउंड्री वॉल जैसी संरचनाओं को मूल्यांकन से बाहर या सीमित किए जाने की संभावना भी चिंता का विषय है। किसानों का आरोप है कि गाइडलाइन दरों में कटौती कर भूमि का मूल्य वास्तविक बाजार मूल्य से काफी कम तय किया जा सकता है।
किसानों ने स्पष्ट कहा कि भूमि के मूल्य में किसी भी प्रकार की कटौती सीधे तौर पर उनकी आजीविका पर हमला होगा और यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन एवं आजीविका के अधिकार का उल्लंघन है। बैठक में यह मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया गया कि भूमि अर्जन के बदले रेलवे बोर्ड में नौकरी या ₹5 लाख की एकमुश्त राशि आजीविका खोने वाले किसानों के लिए पर्याप्त नहीं है। किसानों का कहना है कि यह राशि न तो स्थायी रोजगार का विकल्प है और न ही परिवार के दीर्घकालीन भविष्य को सुरक्षित करती है।
किसानों ने आरोप लगाया कि भूमि अर्जन अधिनियम में वर्णित “न्यायसंगत मुआवजा, पुनर्वास एवं आजीविका संरक्षण” के उद्देश्य वर्तमान प्रक्रिया में पूरे होते नजर नहीं आ रहे हैं। प्रशासन की लगातार चुप्पी से किसानों में असंतोष और हताशा बढ़ती जा रही है, जिसे उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार के विपरीत बताया।
बैठक में महिला किसान लक्ष्मी मानिकपुरी सहित दुर्गेश ठाकुर, प्रदीप देशमुख, महेश, नरेंद्र सिंह राजपूत, छबि लाल निर्मलकर, हरि देशमुख, इंद्रजीत साहू, गोपेश्वर साहू, डी.आर. कोसरे, पुनाराम देवांगन, मलेश निषाद, लखन निषाद समेत बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। दुर्ग ब्लॉक के थानौद, बिरेंझर, चंगोरी, कोनारी, चंदखुरी, भानपुरी, कोड़ियां, कोकड़ी, पउवारा, बोरिगरका, पुरई, करगाडीह, खोपली, घुघसिडीह सहित कई गांवों के किसान बैठक में शामिल हुए।
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि गाइडलाइन दरों, भूमि मूल्यांकन और आजीविका से जुड़े मुद्दों पर शीघ्र पारदर्शी, न्यायसंगत और संवैधानिक निर्णय नहीं लिया गया, तो किसान आंदोलन को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

