Chhattisgarh Durg News: दुर्ग। दुर्ग जिला अस्पताल में सिकल सेल पीड़ित युवती दीपिका गाढ़ा की कथित रूप से समय पर रक्त नहीं मिलने से हुई मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच रिपोर्ट के आधार पर दो डॉक्टरों समेत सात स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इनमें चार संविदा कर्मचारियों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं, जबकि तीन अन्य के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है।
कलेक्टर अभिजीत सिंह ने मामले की जांच की जिम्मेदारी अपर कलेक्टर योगिता देवांगन और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. मनोज दानी को सौंपी थी। लगभग 20 दिनों तक चली जांच में सामने आया कि घटना के समय ब्लड बैंक में 85 यूनिट रक्त उपलब्ध था, इसके बावजूद पीड़िता को समय पर रक्त उपलब्ध नहीं कराया गया। जांच में यह भी पाया गया कि परिजनों को रक्त के लिए डोनर तलाशने भेजा गया, लेकिन डोनर नहीं मिलने के बाद भी ब्लड बैंक से उपलब्ध रक्त जारी नहीं किया गया, जिससे उपचार में गंभीर लापरवाही सामने आई।
चार संविदा कर्मचारियों की सेवा समाप्त
जांच रिपोर्ट के आधार पर रेडक्रॉस सोसायटी के अंतर्गत कार्यरत दो लैब टेक्निशियन तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत नियुक्त दो स्टाफ नर्सों की संविदा सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं। सेवा समाप्त किए गए कर्मचारियों में तरन्नुम जहां, नशरा परवीन, जागेश्वरी देवी और तनुजा चंद्राकर शामिल हैं।
तीन स्वास्थ्यकर्मियों पर विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा
स्वास्थ्य विभाग ने नियमित स्टाफ नर्स अनसतसिया केरकेट्टा, पीजी रेजिडेंट डॉ. निखिल अग्रवाल और एनएचएम विशेषज्ञ डॉ. तृप्ति तिवारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए उनके नियुक्तिकर्ता संयुक्त संचालक को पत्र भेजा है।
कुछ अधिकारियों को बचाने के आरोप
मामले में ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. जे.पी. मेश्राम और आरएमओ डॉ. अखिलेश यादव के बार-बार बयान बदलने के बावजूद उनके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष कार्रवाई नहीं होने पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि मामले के लिए प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से जिम्मेदार कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को कार्रवाई से बचा लिया गया।
एनएचएम कर्मचारी संगठन ने जताई नाराजगी
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई से एनएचएम स्वास्थ्य कर्मचारी संगठन ने असंतोष जताया है। संगठन का आरोप है कि केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर मामले को समाप्त करने का प्रयास किया गया है, जबकि जिम्मेदार अधिकारियों को बचाया गया। संगठन ने मंगलवार को कलेक्टर से मुलाकात कर निष्पक्ष और व्यापक कार्रवाई की मांग करने की घोषणा की है।
यह मामला अब स्वास्थ्य व्यवस्था में जवाबदेही और ब्लड बैंक प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। प्रशासन की कार्रवाई के बावजूद पूरे प्रकरण में सभी जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग लगातार उठ रही है।

