छत्तीसगढ़ में शुरू हो रहे खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 को उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने बताया मील का पत्थर, कहा- राज्य के खेल तंत्र को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

छत्तीसगढ़ में शुरू हो रहे खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 को उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने बताया मील का पत्थर, कहा- राज्य के खेल तंत्र को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

Khelo India Tribal Games 2026 Chhattisgarh रायपुर। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 की मेजबानी के लिए छत्तीसगढ़ पूरी तरह तैयार है। राज्य के उपमुख्यमंत्री एवं खेल मंत्री अरुण साव ने इसे राज्य के खेल पारिस्थितिकी तंत्र के लिए “मील का पत्थर” बताते हुए कहा कि यह आयोजन खेलों में नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा और खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने मंगलवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह आयोजन न केवल राज्य की क्षमताओं की परीक्षा लेगा, बल्कि खेल बुनियादी ढांचे को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा।

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि सरगुजा और बस्तर जैसे क्षेत्रों में पहले छोटे स्तर पर खेल आयोजनों का सफल संचालन किया गया है, लेकिन अब इस राष्ट्रीय स्तर के आयोजन से छत्तीसगढ़ को व्यापक पहचान मिलेगी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने और उन्हें देखने का अनुभव राज्य के खिलाड़ियों के लिए बेहद उपयोगी और प्रेरणादायक साबित होगा।

इस आयोजन में देशभर के 30 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश भाग लेंगे और लगभग 3,800 प्रतिभागी 3 अप्रैल तक चलने वाली प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेंगे। मुकाबले रायपुर, जगदलपुर और सरगुजा में आयोजित किए जाएंगे। कुल 106 स्वर्ण पदक दांव पर होंगे, जिनमें एथलेटिक्स में सर्वाधिक 34 स्वर्ण पदक दिए जाएंगे, जबकि तैराकी, कुश्ती, वेटलिफ्टिंग और तीरंदाजी में भी बड़ी संख्या में पदक वितरित किए जाएंगे। हॉकी और फुटबॉल जैसे टीम खेलों का आयोजन रायपुर में होगा, जबकि एथलेटिक्स जगदलपुर और कुश्ती सरगुजा में आयोजित होगी।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में तीरंदाजी, एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, तैराकी, वेटलिफ्टिंग और कुश्ती में पदक दिए जाएंगे, जबकि मल्लखंब और कबड्डी प्रदर्शन खेल के रूप में शामिल होंगे। इस आयोजन में पुरुष और महिला खिलाड़ियों की भागीदारी लगभग बराबर रखी गई है, जो लैंगिक समानता के सिद्धांत को दर्शाती है। मेजबान छत्तीसगढ़ के अलावा ओडिशा, झारखंड और असम से भी 100 से अधिक खिलाड़ी हिस्सा लेंगे।

इस मौके पर भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान और हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप तिर्की, ओलंपियन सलीमा टेटे और धावक अनिमेष कुजूर ने इस आयोजन को युवाओं के लिए गेम-चेंजर बताया। उन्होंने कहा कि यह मंच आदिवासी समुदाय के खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने और खेलों में करियर बनाने का सुनहरा अवसर प्रदान करेगा।

दिलीप तिर्की ने कहा कि देश में पहली बार इस तरह की चैंपियनशिप आयोजित हो रही है, जो आदिवासी युवाओं के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने नरेंद्र मोदी के उस विजन का भी उल्लेख किया, जिसमें भारत को एक खेल राष्ट्र बनाने की परिकल्पना की गई है। वहीं, केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि खेलों के माध्यम से आदिवासी खिलाड़ियों को बेहतर करियर और पहचान मिल सकती है।

राष्ट्रीय धावक अनिमेष कुजूर ने कहा कि देश के कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां अभी खेल पूरी तरह नहीं पहुंच पाए हैं, ऐसे में यह आयोजन उन प्रतिभाओं को सामने लाने का बड़ा माध्यम बनेगा। उन्होंने सरकार के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल देशभर के आदिवासी युवाओं को एक मंच पर लाने का सराहनीय कदम है।

इस आयोजन में भाग लेने वाले खिलाड़ियों का चयन राष्ट्रीय खेल महासंघों द्वारा आयोजित ट्रायल्स के माध्यम से किया गया है और उनके प्रदर्शन पर भारतीय खेल प्राधिकरण के कोचों की नजर रहेगी। आयोजकों को उम्मीद है कि यह प्रतियोगिता न केवल खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का अवसर देगी, बल्कि भारत को एक मजबूत खेल राष्ट्र बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।

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