छत्तीसगढ़ में डीएड अभ्यर्थियों का आमरण अनशन जारी, 2300 पदों पर नियुक्ति की मांग तेज, प्रदर्शन के दौरान आठ की तबीयत बिगड़ी

छत्तीसगढ़ में डीएड अभ्यर्थियों का आमरण अनशन जारी, 2300 पदों पर नियुक्ति की मांग तेज, प्रदर्शन के दौरान आठ की तबीयत बिगड़ी

CG D.Ed Candidates Protest: छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक भर्ती 2023 को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक उदासीनता और युवाओं के संघर्ष की तस्वीर सामने आई है। भर्ती प्रक्रिया के तहत शेष 2300 रिक्त पदों पर नियुक्ति की मांग को लेकर डीएड (D.Ed.) योग्य अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है।

आमरण अनशन के दौरान बिगड़ी अभ्यर्थियों की हालत

अपनी मांगों को लेकर 24 दिसंबर से आमरण अनशन पर बैठे अभ्यर्थियों की हालत अब चिंताजनक हो गई है। शनिवार को अनशन स्थल पर कृष्णा साहू सहित आठ अभ्यर्थी भूख और कमजोरी के कारण बेहोश होकर गिर पड़े। मौके पर मौजूद साथियों ने तत्काल उन्हें इलाज के लिए अभनपुर और माना के स्वास्थ्य केंद्रों में भर्ती कराया।

डॉक्टरों के अनुसार, कड़ाके की ठंड, लगातार उपवास और मानसिक तनाव के कारण अभ्यर्थियों की स्थिति बिगड़ रही है। इसके बावजूद आंदोलनकारी अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला

डीएड अभ्यर्थियों का आरोप है कि उनके पक्ष में पहले ही छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने दो अहम आदेश दिए थे।

  • 2 अप्रैल 2024
  • 26 सितंबर 2025

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने भी 28 अगस्त 2024 को राज्य शासन को आवश्यक कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश दिए थे।

अभ्यर्थियों का कहना है कि अदालतों के आदेशों के बावजूद सरकार ने अब तक शेष 2300 पदों पर नियुक्ति नहीं दी, जो न्यायालय की अवमानना के समान है।

बीएड धारकों का समायोजन, डीएड अभ्यर्थी उपेक्षित

आंदोलनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि प्रशासन ने पहले 2621 बीएड (B.Ed.) धारकों को सहायक शिक्षक पद से हटाकर विज्ञान प्रयोगशालाओं में समायोजित कर दिया, लेकिन इसके बाद खाली हुए पदों पर डीएड योग्य उम्मीदवारों को नियुक्त नहीं किया गया।

उनका आरोप है कि भर्ती नियमों और न्यायालय के आदेशों के अनुसार प्राथमिक कक्षाओं के लिए डीएड योग्य अभ्यर्थियों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी, लेकिन सरकार ने इस नियम का पालन नहीं किया।

200 से अधिक अभ्यर्थी भूख हड़ताल पर

फिलहाल आंदोलन स्थल पर लगभग 200 अभ्यर्थी आमरण अनशन पर बैठे हैं। ठंड, खुले आसमान और सीमित संसाधनों के बीच ये युवा पिछले कई दिनों से संघर्ष कर रहे हैं। अभ्यर्थियों में इस बात को लेकर गहरी नाराजगी है कि आंदोलन शुरू होने के बाद अब तक शासन या प्रशासन की ओर से कोई भी जिम्मेदार प्रतिनिधि उनसे मिलने नहीं आया है।

वर्ष 2023 से नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे ये युवा मानसिक, शारीरिक और आर्थिक रूप से टूट चुके हैं, लेकिन फिर भी अपने अधिकारों की लड़ाई जारी रखने का संकल्प लिए हुए हैं।

क्या हैं अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें

  • हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का तत्काल पालन
  • सहायक शिक्षक भर्ती 2023 के शेष 2300 पदों पर तुरंत नियुक्ति
  • भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों का पालन

विधानसभा में भी उठा मामला

यह मुद्दा हाल ही में छत्तीसगढ़ विधानसभा में भी गूंज चुका है। 17 दिसंबर 2025 को विधायक रिकेश सेन ने विधानसभा सत्र के दौरान इस भर्ती प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाया था।

आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि अनशन के दौरान किसी भी अभ्यर्थी को गंभीर स्वास्थ्य नुकसान होता है, तो इसकी नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, वित्त मंत्री और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की होगी।

प्रदेश में यह आंदोलन अब केवल नौकरी का सवाल नहीं, बल्कि शासन की संवेदनशीलता और न्यायिक आदेशों के सम्मान की कसौटी बनता जा रहा है।


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