महाकालेश्वर मंदिर में गर्भगृह प्रवेश विवाद, हाईकोर्ट में फैसला रखा सुरक्षित, क्या VIP कल्चर पर लगेगी रोक

महाकालेश्वर मंदिर में गर्भगृह प्रवेश विवाद, हाईकोर्ट में फैसला रखा सुरक्षित, क्या VIP कल्चर पर लगेगी रोक

मध्यप्रदेश। उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में आम श्रद्धालुओं के लिए गर्भगृह में प्रवेश पर प्रतिबंध और वीआईपी, नेताओं व प्रभावशाली व्यक्तियों को विशेष प्रवेश दिए जाने का मुद्दा अब इंदौर हाईकोर्ट पहुंच गया। एक जनहित याचिका में इस बात पर सवाल उठाया गया है कि देशभर से आने वाले लाखों भक्तों को बाहर से ही भगवान महाकाल के दर्शन करने पड़ते हैं जबकि वीआईपी और नेता आसानी से गर्भगृह में प्रवेश कर पूजा-अर्चना कर रहे हैं।

गुरुवार को इंदौर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इस याचिका पर सुनवाई की। याचिका में मध्य प्रदेश सरकार, महाकालेश्वर मंदिर ट्रस्ट, उज्जैन के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को पक्षकार बनाया गया है। सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

याचिकाकर्ता ने उठाए सवाल

इंदौर के निवासी दर्पण अवस्थी ने अपने वकील चर्चित शास्त्री के माध्यम से हाईकोर्ट में तर्क दिया कि प्रभावशाली व्यक्तियों को गर्भगृह में प्रवेश और पूजा का विशेषाधिकार मिल रहा है, जबकि दूर-दूर से आने वाले सामान्य श्रद्धालु केवल बाहर से दर्शन करने को मजबूर हैं।

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21 जुलाई की घटना से उठा विवाद

यह मामला तब और गरमाया जब 21 जुलाई को इंदौर के विधायक गोलू शुक्ला और उनके बेटे रुद्राक्ष द्वारा कथित तौर पर जबरन मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश का मामला सामने आया। इसके बाद दर्पण अवस्थी ने मंदिर की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए और सभी भक्तों के लिए गर्भगृह में दर्शन की सुविधा सुनिश्चित करने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

आरटीआई में नहीं मिली जानकारी

याचिकाकर्ता के वकील चर्चित शास्त्री ने बताया कि उन्होंने आरटीआई के जरिए मंदिर समिति से यह पूछा था कि नेताओं, अधिकारियों और अन्य प्रभावशाली लोगों को गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति किसके आदेश पर दी जाती है। हालांकि, मंदिर समिति ने इस संबंध में कोई जवाब नहीं दिया।

याचिका में समान अवसर की मांग

याचिका में मांग की गई है कि वीआईपी या प्रभावशाली व्यक्तियों के नाम पर गर्भगृह में किसी को भी विशेष प्रवेश न दिया जाए। इसके बजाय ऐसी नीति बनाई जाए, जिससे सामान्य भक्त भी गर्भगृह में प्रवेश कर भगवान महाकाल के दर्शन कर सकें। इसके लिए शुल्क निर्धारित करने का सुझाव भी दिया गया है, ताकि सभी श्रद्धालुओं को समान अवसर मिल सके।


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