CG News: सीएम विष्णुदेव साय ने की स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा, 25 नए डायलिसिस केंद्र शुरू करने की तैयारी, मिलावटखोरों पर कार्रवाई के निर्देश

CG News: सीएम विष्णुदेव साय ने की स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा, 25 नए डायलिसिस केंद्र शुरू करने की तैयारी, मिलावटखोरों पर कार्रवाई के निर्देश

CG Healthcare Services Review Meeting: रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंत्रालय महानदी भवन में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग के कामकाज की उच्चस्तरीय समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार, अस्पतालों में डॉक्टरों और विशेषज्ञों की उपलब्धता, आवश्यक दवाइयों, जांच सुविधाओं, एम्बुलेंस सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा की स्थिति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए और संसाधनों की कमी के कारण किसी मरीज को परेशानी नहीं होनी चाहिए।

स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए बनेगी दीर्घकालिक कार्ययोजना

मुख्यमंत्री साय ने प्रदेश की बढ़ती आबादी और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास की दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में वर्तमान स्वास्थ्य सुविधाओं, जनसंख्या, भौगोलिक परिस्थितियों और उपलब्ध संसाधनों का आकलन किया जाए। इसके आधार पर अस्पतालों के विस्तार और नई सुविधाओं के विकास की योजना बनाई जाए।

मुख्यमंत्री ने अस्पतालों में जरूरत के अनुसार बिस्तरों की संख्या बढ़ाने, विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं का विस्तार करने और नवगठित जिलों में आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाओं को प्राथमिकता देने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल अस्पताल भवन बनाने से स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर नहीं होंगी, बल्कि वहां पर्याप्त डॉक्टर, स्वास्थ्यकर्मी, चिकित्सा उपकरण, दवाइयां और जांच सुविधाएं भी उपलब्ध होनी चाहिए।

1,045 स्वास्थ्य संस्थानों में संचालित हैं अटल आरोग्य लैब

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के 1,045 स्वास्थ्य संस्थानों में अटल आरोग्य लैब संचालित हैं। इसके अलावा डायलिसिस, ट्रॉमा केयर, ब्लड बैंक, आईसीयू और सीटी स्कैन जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश के 33 स्थानों पर डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध है और 25 नए डायलिसिस केंद्र शुरू किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने ई-हॉस्पिटल और आभा जैसी डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं की भी समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक का उपयोग मरीजों को बेहतर सुविधा देने, स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यक्षमता बढ़ाने और उपचार प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए किया जाना चाहिए।

जिला अस्पताल से PHC तक दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करें

मुख्यमंत्री ने जिला अस्पतालों से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक आवश्यक दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सामान्य जांच और उपचार के लिए मरीजों को अनावश्यक रूप से एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकना नहीं पड़े। मुख्यमंत्री ने चिकित्सा उपकरणों के रखरखाव और समय पर मरम्मत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि उपकरणों की खराबी के कारण महत्वपूर्ण चिकित्सा सुविधाएं लंबे समय तक बंद नहीं रहनी चाहिए। इसके लिए नियमित निगरानी और समयबद्ध मरम्मत की व्यवस्था विकसित की जाए।

बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की वित्तीय प्रगति, मानव संसाधन तथा रिक्त पदों पर भर्ती की स्थिति की भी समीक्षा हुई। अधिकारियों ने बताया कि रिक्त पदों पर भर्ती के प्रयास जारी हैं और सेवा भर्ती नियमों में आवश्यक संशोधन की प्रक्रिया भी चल रही है। मुख्यमंत्री ने भर्ती संबंधी प्रक्रियाओं में तेजी लाने के निर्देश दिए।

हर प्रसव सुरक्षित हो, जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ रहें

मुख्यमंत्री साय ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता देते हुए गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, पोषण, चिकित्सा देखभाल और सुरक्षित संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव से जुड़ी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध रहें तथा प्रसूता महिलाओं की सुरक्षा, सुविधा और गरिमा का विशेष ध्यान रखा जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक प्रसव सुरक्षित हो और जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ रहें, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग को संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ काम करना होगा। उन्होंने मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर को राष्ट्रीय औसत के करीब लाने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश भी दिए।

बैठक में संस्थागत प्रसव, पूर्ण टीकाकरण, विशेष पिछड़ी जनजातियों में टीकाकरण, मलेरिया की रोकथाम, कुष्ठ रोग निवारण और टीबी उन्मूलन कार्यक्रमों की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया, ताकि बीमारियों की समय पर पहचान और उपचार हो सके।

दुर्गम क्षेत्रों में एम्बुलेंस नहीं पहुंची तो बनेगी वैकल्पिक व्यवस्था

मुख्यमंत्री ने 108 संजीवनी एक्सप्रेस और 102 महतारी एक्सप्रेस सेवाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि आपात स्थिति में मरीजों तक समय पर चिकित्सा सहायता पहुंचना बेहद जरूरी है। दूरस्थ, वनांचल और दुर्गम क्षेत्रों के नागरिकों को केवल भौगोलिक कठिनाइयों के कारण उपचार से वंचित नहीं होना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों में सड़क या अन्य भौगोलिक परिस्थितियों के कारण एम्बुलेंस नहीं पहुंच सकती, वहां स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था विकसित की जाए। मरीजों को गांव से एम्बुलेंस प्वाइंट या निकटतम स्वास्थ्य केंद्र तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए व्यावहारिक व्यवस्था बनाई जाए।

बैठक में दी गई जानकारी के अनुसार, प्रदेश में 108 संजीवनी एक्सप्रेस के तहत 375 एम्बुलेंस और 102 महतारी एक्सप्रेस के तहत 380 वाहन उपलब्ध हैं। जनवरी से अगस्त 2026 तक महतारी एक्सप्रेस सेवा से 2 लाख 19 हजार से अधिक हितग्राही लाभान्वित हुए हैं। मुख्यमंत्री ने इन सेवाओं का समयबद्ध और प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने को कहा।

शव वाहन के लिए परेशान न हों परिजन

मुख्यमंत्री साय ने शव वाहन सेवाओं को मजबूत बनाने के निर्देश देते हुए कहा कि किसी परिजन को खोना परिवार के लिए अत्यंत पीड़ादायक होता है। ऐसे समय में परिवार को शव वाहन जैसी बुनियादी सुविधा के लिए परेशान नहीं होना चाहिए। उन्होंने अस्पताल में मृत्यु होने की स्थिति में परिजनों को शव वाहन की सुविधा सहजता और समय पर उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करने को कहा। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य सेवाओं में मानवीय संवेदनाओं, परिवार की गरिमा और जरूरतों का सम्मान करने पर जोर दिया।

सिकल सेल उन्मूलन के लिए जांच और जागरूकता बढ़ाने पर जोर

मुख्यमंत्री ने सिकल सेल रोग की रोकथाम, जांच और उपचार के लिए संचालित कार्यक्रमों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि सिकल सेल एक आनुवंशिक बीमारी है, इसलिए इसके प्रति व्यापक जनजागरूकता जरूरी है। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में स्क्रीनिंग, परामर्श और उपचार सुविधाओं को मजबूत करने के निर्देश दिए। साथ ही विवाह पूर्व स्वैच्छिक जांच और आनुवंशिक परामर्श के प्रति लोगों को जागरूक करने पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2047 तक सिकल सेल उन्मूलन के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए योजनाबद्ध प्रयास करने को कहा। मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य भी समग्र स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को लेकर जागरूकता बढ़ाई जाए और जरूरतमंद लोगों तक परामर्श एवं उपचार सुविधाओं की जानकारी पहुंचाई जाए।

स्वस्थ बस्तर अभियान से एक लाख लोगों को मिला उपचार

बैठक में आयुष्मान भारत योजना, मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना, आयुष्मान आरोग्य मंदिर, मोबाइल हेल्थ सेवाओं और मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान की प्रगति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत एक लाख लोगों को उपचार का लाभ मिला है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पात्र मरीजों को आयुष्मान भारत योजना का पूरा लाभ मिले और दूरस्थ क्षेत्रों में सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाई जाए।

प्रदेश में छह नए मेडिकल कॉलेज स्वीकृत

मुख्यमंत्री साय ने चिकित्सा शिक्षा विभाग की समीक्षा के दौरान कहा कि मेडिकल कॉलेजों और चिकित्सा शिक्षा सुविधाओं के विस्तार के साथ गुणवत्ता पर भी समान रूप से ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने पर्याप्त फैकल्टी, विशेषज्ञ चिकित्सकों और आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 15 शासकीय मेडिकल कॉलेज, एक एम्स और छह निजी मेडिकल कॉलेज सहित कुल 22 चिकित्सा संस्थान हैं। इसके अतिरिक्त छह नए मेडिकल कॉलेज स्वीकृत किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों की प्रगति, नए संस्थानों की स्थापना और संचालित कॉलेजों में फैकल्टी एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता की समीक्षा की। उन्होंने निर्माण कार्यों और अन्य व्यवस्थाओं से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं का समयबद्ध निराकरण करने को कहा। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज केवल चिकित्सा शिक्षा के संस्थान नहीं हैं, बल्कि संबंधित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए वहां गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ बेहतर ओपीडी, आईपीडी और जांच सुविधाएं भी विकसित की जानी चाहिए।

नर्सिंग और एलाइड हेल्थ एजुकेशन का भी होगा विस्तार

बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में शासकीय नर्सिंग कॉलेजों की संख्या आठ से बढ़कर 17 और फिजियोथेरेपी कॉलेजों की संख्या एक से बढ़कर सात हो गई है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ में पहली बार एलाइड हेल्थ से जुड़े 11 पाठ्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं। इनके तहत 10 मेडिकल कॉलेजों में 640 सीटों की व्यवस्था की गई है। प्रदेश में पहली बार रायपुर के मेकाहारा अस्पताल में डीएम कार्डियोलॉजी की दो सीटें भी शुरू की गई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा के विस्तार से प्रशिक्षित डॉक्टरों, नर्सिंग कर्मियों, फिजियोथेरेपिस्ट और अन्य स्वास्थ्य पेशेवरों की उपलब्धता बढ़ेगी। इससे प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी।

त्योहारी सीजन में मिलावटखोरों पर होगी सख्ती

मुख्यमंत्री साय ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की समीक्षा के दौरान आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और शुद्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रदेशभर में सघन जांच अभियान चलाने और मिठाई, दुग्ध उत्पादों सहित अन्य खाद्य पदार्थों के निर्माण, भंडारण और बिक्री स्थलों की नियमित जांच करने को कहा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अमानक या मिलावटी खाद्य पदार्थ पाए जाने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए। आम नागरिकों के स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उन्होंने छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन के कार्यों की समीक्षा करते हुए दवाइयों की खरीदी, आपूर्ति, भंडारण और वितरण व्यवस्था को भी दुरुस्त रखने के निर्देश दिए। साथ ही आयुष एवं राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत संचालित योजनाओं और संस्थानों की समीक्षा कर उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने को कहा।

अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवा पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता

मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों से कहा कि स्वास्थ्य योजनाओं की वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि जरूरत के समय उनका लाभ आम नागरिकों तक कितनी सहजता और समयबद्धता से पहुंचता है। जिला स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं की नियमित समीक्षा की जाए और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कमियों को दूर किया जाए।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार के साथ सेवाओं को अधिक सुलभ, संवेदनशील और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार का लक्ष्य है कि शहरों से लेकर सुदूर वनांचलों तक प्रत्येक नागरिक को जरूरत पड़ने पर समय पर बेहतर उपचार मिले और चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में किसी परिवार को परेशानी का सामना न करना पड़े।


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