नई दिल्ली। कैश कांड मामले में CJI जस्टिस संजीव खन्ना ने जस्टिस यशवंत वर्मा के घर पर मिले कैश के मामले में तीन सदस्यीय जांच रिपोर्ट को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेज दिया है। रिपोर्ट में कमेटी ने पाया है कि, जस्टिस वर्मा के खिलाफ लगे आरोप सही हैं और CJI उनको पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।
तीन सदस्यीय पैनल द्वारा न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के आवास पर नकदी पाए जाने के आरोपों को विश्वसनीय पाए जाने के बाद, भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने उनका इस्तीफा मांगा है। हालांकि, न्यायमूर्ति वर्मा ने इनकार कर दिया।
सीजेआई ने अब न्यायाधीशों के तीन सदस्यीय जांच पैनल की रिपोर्ट और न्यायमूर्ति वर्मा के जवाब को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है।
सीजेआई ने 22 मार्च को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति शील नागू, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी एस संधावालिया और कर्नाटक उच्च न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति अनु शिवरामन की सदस्यता वाली समिति गठित की थी। यह समिति दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश के आवास पर आग लगने के बाद नकदी बरामदगी के आरोपों की जांच कर रही थी।
न्यायमूर्ति वर्मा का 20 मार्च को तबादला कर दिया गया था और उन्होंने 5 अप्रैल को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। समिति द्वारा अपनी रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद सीजेआई खन्ना ने 4 मई को न्यायमूर्ति वर्मा को पत्र लिखकर रिपोर्ट की एक प्रति साझा की। बताया जाता है कि सीजेआई ने रिपोर्ट की प्रस्तावना में न्यायमूर्ति वर्मा को अपना इस्तीफा देने का विकल्प दिया है।

