PM Modi Somanth Visit: ‘जो सभ्यताएं दूसरों को मिटाकर बढ़ना चाहती हैं, वो खुद मिट जाती हैं’, सोमनाथ में PM मोदी का बड़ा संदेश

PM Modi Somanth Visit: ‘जो सभ्यताएं दूसरों को मिटाकर बढ़ना चाहती हैं, वो खुद मिट जाती हैं’, सोमनाथ में PM मोदी का बड़ा संदेश

PM Modi Somanth Visit: सौराष्ट्र। पीएम मोदी आज (रविवार को) सोमनाथ के दौरे पर हैं। वह यहां शौर्य यात्रा में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की और मंदिर की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर देने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी। PM मोदी ने कहा कि मैं अपना बहुत बड़ा सौभाग्य मानता हूं कि सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में मुझे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में सक्रिय सेवा का अवसर मिला है। आज देश के कोने-कोने से लाखों लोग हमारे साथ जुड़े हैं, उन सबको मेरी तरफ से जय सोमनाथ।

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व क्यों है भव्य?

ये समय अद्भुत है, ये वातावरण अद्भुत है, ये उत्सव अद्भुत है। एक ओर देवाधिदेव महादेव, दूसरी ओर समुद्र की लहरें, सूर्य की किरणें, मंत्रों की ये गूंज, आस्था का ये उफान और इस दिव्य वातावरण में भगवान सोमनाथ के भक्तों की उपस्थिति इस अवसर को भव्य और दिव्य बना रही है।

PM मोदी ने बलिदानियों को किया याद

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज से करीब 1 हजार पर इसी जगह पर सोचिए क्या माहौल रहा होगा। तब हमारे पूर्वजों ने अपनी जान की बाजी लगा दी थी। हमारे पुरखों ने अपना सबकुछ न्योछावर कर दिया था। मैं दुनियाभर के श्रद्धालुओं को सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा की शुभकामनाएं देता हूं।

PM मोदी ने की ड्रोन शो की तारीफ

पीएम मोदी ने कहा, ’72 घंटों तक अनवरण ओंकार का नाद, 72 घंटों का अनवरण मंत्रोच्चार। मैंने देखा, कल रात 1,000 ड्रोन द्वारा, वैदिक गुरुकुलों के 1,000 विद्यार्थियों की उपस्थिति, सोमनाथ के 1,000 वर्षों की गाथा का प्रदर्शन। और आज 108 अश्वों के साथ मंदिर तक शौर्य यात्रा, मंत्रों और भजनों की अद्भुत प्रस्तुति, सबकुछ मंत्र-मुग्ध कर देने वाला है। इस अनुभूति को शब्दों में अभिव्यक्त नहीं किया जा सकता, इसे केवल समय ही संकलित कर सकता है।’

‘हमारे पुरखों ने अपने प्राण किए न्योछावर’

उन्होंने कहा, ‘एक हजार साल पहले, इसी जगह पर क्या माहौल रहा होगा। आप जो यहां उपस्थित हैं, उनके पुरखों ने, हमारे पुरखों ने जान की बाजी लगा दी थी। अपनी आस्था के लिए, अपने विश्वास के लिए, अपने महादेव के लिए उन्होंने अपना सबकुछ न्योछावर कर दिया। हजार साल पहले वे आततायी सोच रहे थे कि उन्होंने हमें जीत लिया, लेकिन आज एक हजार साल बाद भी, सोमनाथ महादेव के मंदिर पर फहरा रही ध्वजा पूरी सृष्टि का आह्वान कर रही है कि हिंदुस्तान की शक्ति क्या है, उसका सामर्थ्य क्या है।’


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