Brijmohan Agrawal Statement रायपुर। भारतीय खाद्य निगम (FCI) में हो रहे तकनीक आधारित आधुनिकीकरण और नई व्यवस्थाओं के साथ छत्तीसगढ़ ने देश के “राइस पावरहाउस” के रूप में अपनी पहचान और मजबूत कर ली है। उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा जारी नए आंकड़ों के अनुसार राज्य में धान की खरीद में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे किसानों की आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है और राज्य की खाद्य आपूर्ति श्रृंखला को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं।
जारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले पांच वर्षों में छत्तीसगढ़ में एफसीआई और राज्य एजेंसियों द्वारा खरीदे गए धान के मूल्य में बड़ी बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2020-21 में जहां धान खरीद का कुल मूल्य 13,419.90 करोड़ रुपये था, वहीं वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर 27,009.44 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इस तरह धान खरीद के मूल्य में लगभग 102 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इसी अवधि में खरीद की मात्रा भी 71.08 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 116.42 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गई है।
एफसीआई छत्तीसगढ़ राज्य परामर्शदात्री समिति के अध्यक्ष और सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि राष्ट्रीय खाद्य भंडार में छत्तीसगढ़ का योगदान गर्व का विषय है और यह देश की खाद्य सुरक्षा का एक मजबूत स्तंभ बन चुका है। उन्होंने कहा कि किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने और खरीद प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए कई तकनीकी और प्रशासनिक सुधार किए जा रहे हैं। इसके तहत लॉजिस्टिक बाधाओं को दूर करने, अनाज के भंडारण की गुणवत्ता सुधारने और गोदामों का नियमित निरीक्षण सुनिश्चित किया जा रहा है।
धान और अन्य अनाज के परिवहन को अधिक कुशल बनाने के लिए भारतीय खाद्य निगम ने आईआईटी दिल्ली के फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (FITT) के साथ साझेदारी की है। इसके तहत अत्याधुनिक ‘रूट ऑप्टिमाइजेशन’ अध्ययन शुरू किया गया है। यह डिजिटल टूल रेलवे के एफओआईएस पोर्टल से जुड़कर दैनिक रेक योजना तैयार करेगा और माल ढुलाई की गणना को स्वचालित बनाएगा। फरवरी 2025 से इस प्रणाली के लागू होने के बाद छत्तीसगढ़ से देश के विभिन्न हिस्सों तक अनाज को कम लागत और तेज गति से पहुंचाने में मदद मिल रही है।
राज्य में अनाज भंडारण क्षमता को भी लगातार मजबूत किया जा रहा है। वर्तमान में छत्तीसगढ़ में कुल भंडारण क्षमता 32.41 लाख मीट्रिक टन है, जिसमें से 21.15 लाख मीट्रिक टन एफसीआई के अधीन और 11.26 लाख मीट्रिक टन राज्य एजेंसियों के पास है। इस क्षमता को और आधुनिक बनाने के लिए सरकार परिसंपत्ति मुद्रीकरण योजना के माध्यम से मौजूदा गोदामों और बुनियादी ढांचे को उन्नत करने की दिशा में काम कर रही है। इस योजना के तहत दुर्ग और अर्जुन स्थित एफएसडी केंद्रों को प्रमुख रूप से चिन्हित किया गया है।
इन सभी प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर खाद्य भंडारण और वितरण प्रणाली को मजबूत करने की व्यापक रणनीति के तहत लागू किया जा रहा है। इसके अंतर्गत पीईजी योजना के माध्यम से पारंपरिक गोदामों में निजी निवेश को प्रोत्साहन, पीपीपी मॉडल पर आधुनिक साइलो निर्माण, केंद्रीय क्षेत्र योजना के तहत रणनीतिक क्षेत्रों में भंडारण क्षमता का विस्तार और परिसंपत्ति मुद्रीकरण के जरिए मौजूदा भूमि और संसाधनों का बेहतर उपयोग शामिल है। इन पहलों के माध्यम से छत्तीसगढ़ को देश की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था में और अधिक सशक्त भूमिका निभाने के लिए तैयार किया जा रहा है।

