Janjgir-Champa News: जांजगीर-चांपा। जिले की चांपा पुलिस ने साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए म्यूल अकाउंट के जरिए साइबर अपराधियों की मदद करने वाले एक महिला समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। मामले में करीब 18 लाख 17 हजार 216 रुपये की साइबर ठगी का खुलासा हुआ है।
पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई पुलिस मुख्यालय रायपुर के निर्देश पर चलाए जा रहे साइबर अपराध नियंत्रण अभियान के तहत की गई। जांच में सामने आया कि आरोपी कमीशन के लालच में अपने नाम से बैंक खाते खुलवाकर उन्हें साइबर ठगों को इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराते थे। इन खातों के जरिए ऑनलाइन ठगी से हासिल रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर की जाती थी, जिससे असली अपराधियों तक पुलिस की पहुंच मुश्किल हो जाती थी।
समन्वय पोर्टल से प्राप्त जानकारी के आधार पर चांपा पुलिस ने संदिग्ध बैंक खातों और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की तकनीकी जांच की। जांच में पता चला कि आरोपियों द्वारा उपलब्ध कराए गए खातों में देश के विभिन्न राज्यों में हुई साइबर ठगी की 18.17 लाख रुपये से अधिक की रकम ट्रांसफर की गई थी। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान पिंकी डडसेना (37 वर्ष), निवासी बरपालीकला, थाना नगरदा, जिला सक्ती तथा सूरज जांगड़े (24 वर्ष), निवासी हसौद, जिला सक्ती के रूप में हुई है।
क्या होता है म्यूल अकाउंट?
पुलिस ने बताया कि म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते होते हैं, जिन्हें कुछ लोग कमीशन या पैसों के लालच में साइबर अपराधियों को इस्तेमाल करने के लिए उपलब्ध करा देते हैं। इन खातों का उपयोग ठगी की रकम को एक खाते से दूसरे खाते में भेजने के लिए किया जाता है, ताकि अपराधियों की पहचान छिपी रहे और जांच प्रभावित हो।
पुलिस की अपील
चांपा पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति के कहने पर अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक, मोबाइल नंबर या ओटीपी किसी के साथ साझा न करें और न ही किसी लालच में अपना खाता इस्तेमाल करने दें। पुलिस ने स्पष्ट किया कि इस तरह की गतिविधियों में शामिल व्यक्ति को भी साइबर अपराध का बराबर का आरोपी माना जाता है और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ जेल की सजा भी हो सकती है।

