Janeu Removal Row Bengaluru: कर्नाटक में बेंगलुरु के एक कॉलेज के कर्मचारियों ने CET एग्जाम सेंटर पर कथित रूप से अभ्यर्थी से उसका जनेऊ उतरवाया था। इस मामले में तीन कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया गया है। इस मामले के सामने आने के बाद कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण (KEA) ने तीन कर्मचारियों के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। इन कर्मचारियों पर आरोप है कि उन्होंने कॉमन एंट्रेंस टेस्ट यानी CET 2026 के दौरान, एग्जाम हाल में प्रवेश करने से पहले एक अभ्यर्थी को जनेऊ हटाने के लिए मजबूर किया था।
जनेऊ उतरवाने वाले कर्मचारियों पर एक्शन
कॉलेज प्रशासन ने इस घटना में शामिल तीनों कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है। बता दें कि यह घटना 23 अप्रैल, 2026 को हुई थी। फिर यह विवाद तब बढ़ा जब कृपानिधि प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज में फिजिक्स और केमिस्ट्री के पेपर देने आए अभ्यर्थी ने मीडिया को आपबीती बताई। अभ्यर्थी ने आरोप लगाया कि धातु की वस्तुओं से जुड़े नियमों का पालन करने के बावजूद, कर्मचारियों उससे जनेऊ हटाने की मांग की।
धातु की चीज पर प्रतिबंध लेकिन जनेऊ क्यों उतरवाया?
अभ्यर्थी ने कहा, ‘मैंने तर्क दिया कि मैंने कोई धातु की चीज नहीं पहनी है और उस पर कुछ भी नहीं लिखा है, लेकिन उन्होंने मुझे अंदर नहीं जाने दिया। उन्होंने मुझे इसे हटाने के लिए मजबूर किया। यह हमारी धार्मिक भावना का मामला है, मैं इतना तनाव में आ गया था कि ठीक से पेपर नहीं लिख पाया। कम से कम तीन से चार अन्य अभ्यर्थियों से भी इसी तरह की मांग की गई थी।’
कर्मचारियों को दिए गए थे स्पष्ट निर्देश
KEA के कार्यकारी निदेशक ने बेंगलुरु शहर के जिला कलेक्टर को एक औपचारिक पत्र लिखकर इस पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने साफ किया कि कर्मचारियों की ट्रेनिंग के दौरान स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे, जिसमें पिछले विवादों का हवाला दिया गया था कि पवित्र धागे और लिंगायत इष्टलिंग जैसे धार्मिक प्रतीकों को नहीं हटाया जाना चाहिए। कार्यकारी निदेशक ने आगे कहा कि अगर इन दिशानिर्देशों का उल्लंघन किया गया है, तो ऐसा प्रथम दृष्टया प्रतीत होता है कि ऐसा जानबूझकर किया गया है।
जांच पूरी होने तक निलंबित रहेंगे कर्मचारी
वहीं, कृपानिधि PU कॉलेज के प्रिंसिपल असीम अफजल ने तुरंत तीन कर्मचारियों को सस्पेंड करने के आदेश जारी किए। निलंबित किए गए कर्मचारियों में सुधाकर, सरिता और गिरिजम्मा हैं। यह निलंबन पूरी जांच होने तक जारी रहेगा। इसके अलावा, मडिवाला पुलिस ने कथित उत्पीड़न और धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन की जांच के लिए एक FIR भी दर्ज की है।

