रायपुर। देशभर में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण अब सड़कों पर घूमता गोवंश बनता जा रहा है। आए दिन समाचारों में देखने-सुनने को मिलता है कि सड़कों पर बैठे या अचानक सामने आ जाने वाले मवेशियों के कारण दुर्घटनाएं हो रही हैं, जिनमें कभी मानव तो कभी गोवंश अपनी जान गंवा रहा है।
राजधानी रायपुर सहित कई शहरों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। विधानसभा रोड, एक्सप्रेसवे, बिलासपुर रोड, वीआईपी रोड, राजिम रोड और अन्य प्रमुख मार्गों पर अक्सर गायों के झुंड सड़क पर बैठे या चलते दिखाई देते हैं। तेज रफ्तार वाहनों के सामने अचानक इनके आ जाने से चालक को इमरजेंसी ब्रेक लगाना पड़ता है, जिससे पीछे या आगे चल रही गाड़ियों से टक्कर हो जाती है और गंभीर हादसे हो जाते हैं।
इन दुर्घटनाओं में न केवल मानव जीवन और संपत्ति का नुकसान होता है, बल्कि बड़ी संख्या में गोवंश भी कुचले जाते हैं। कई बार एक साथ कई गायों की मौत की घटनाएं सामने आती हैं, जिससे यातायात भी बाधित होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि खेतों में फसल खड़ी रहने के दौरान मवेशियों को वहां जाने से रोका जाता है, जिसके कारण वे सड़कों पर बैठने को मजबूर हो जाते हैं। इसी समस्या के समाधान के रूप में एक व्यावहारिक सुझाव सामने आया है—हर गांव या दो-चार गांवों के बीच चारागाह की व्यवस्था और चरवाहों की नियुक्ति।
इस मॉडल से कई लाभ हो सकते हैं:
गोवंश को सुरक्षित स्थान मिलेगा
सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी
स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा
लोगों में फिर से गाय पालन की परंपरा को बढ़ावा मिलेगा
वर्तमान समय में शहरीकरण और व्यस्त जीवनशैली के कारण लोग गोवंश की देखभाल नहीं कर पा रहे हैं। चारागाह और चरवाहा व्यवस्था से इस समस्या का समाधान संभव है। पहले से बने गोठानों को विकसित कर चारागाह के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
समाज के अन्य वर्गों के लिए जिस तरह सामुदायिक भवन बनाए जाते हैं, उसी तरह गोवंश के लिए भी स्थायी व्यवस्था की आवश्यकता महसूस की जा रही है। केवल जागरूकता या प्रतियोगिताओं से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस कदम उठाने से ही गोवंश और मानव जीवन दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
डॉ. भारती अग्रवाल
रायपुर, छत्तीसगढ़

