Raipur Today News: रायपुर। कभी नक्सल हिंसा और भय के कारण मुख्यधारा से कट चुका सुकमा जिले का जगरगुंडा अब विकास और सुशासन की नई पहचान बनता जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और प्रभारी मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन द्वारा किए गए प्रयासों से क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार हुआ है। लंबे समय से उपेक्षित रहे इस इलाके में अब सकारात्मक बदलाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
अंधेरे से उजाले की ओर
पिछले दो दशकों में जगरगुंडा ने संपर्क व्यवस्था की कमी, सुरक्षा चुनौतियों और मूलभूत सुविधाओं के अभाव का कठिन दौर देखा। वर्ष 2006 के बाद पुल-पुलियों के क्षतिग्रस्त होने और सुरक्षा कारणों से यह क्षेत्र लगभग अलग-थलग हो गया था। शाम होते ही आवाजाही सीमित हो जाती थी। अब प्रशासनिक पहल से हालात सामान्य हो रहे हैं और क्षेत्र धीरे-धीरे सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है। लोगों को आवागमन के साधन और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं।
सोलर स्ट्रीट लाइट से बढ़ी सुरक्षा
जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) मद से पूरे क्षेत्र में सोलर स्ट्रीट लाइट स्थापित की गई हैं। जहां पहले शाम होते ही अंधेरा और सन्नाटा छा जाता था, वहीं अब रोशनी और सुरक्षा का माहौल है। इससे ग्रामीणों की आवाजाही सुगम हुई है और स्थानीय बाजारों में गतिविधियां भी बढ़ी हैं।
22 वर्षों बाद शुरू हुई बैंकिंग सेवा
वर्ष 2003 में बैंक लूट की घटना के बाद जगरगुंडा में बैंकिंग सेवाएं बंद हो गई थीं। अब वर्ष 2025 में Indian Overseas Bank की शाखा शुरू होने से ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है। बैंक खुलने से लोगों को वित्तीय कार्यों के लिए दूरदराज नहीं जाना पड़ता और क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला है।
विकास कार्यों को मिली रफ्तार
कलेक्टर सुकमा के अनुसार जगरगुंडा का विकास केवल आधारभूत संरचना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र में विश्वास और नई उम्मीद का प्रतीक बन चुका है। तहसील भवन का निर्माण प्रारंभ हो चुका है। डीएमएफ मद से 1 करोड़ 30 लाख रुपये की लागत से बस स्टैंड का निर्माण प्रस्तावित है। हाईटेक नर्सरी के लिए 1.5 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। वन विभाग के रेंज कार्यालय का निर्माण जारी है, जबकि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) का कार्य मई 2026 तक पूर्ण होने की संभावना है।
जनभागीदारी से संभव हुआ बदलाव
जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और ग्राम पंचायतों के समन्वय से शासन की योजनाएं अब धरातल पर दिखने लगी हैं। स्थानीय जनभागीदारी ने विकास कार्यों को गति दी है। जगरगुंडा, जो कभी भय और असुरक्षा का पर्याय था, अब विकास और सुशासन के नए दौर में प्रवेश कर रहा है।

