“वंदे मातरम” की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित भव्य कार्यक्रम में देशभक्ति का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। इस मौके पर आयोजित विशेष साक्षात्कार में एक पूर्व भारतीय सैनिक ने अपने जीवन से जुड़े प्रेरणादायक अनुभव साझा करते हुए “देश प्रथम” की भावना को सर्वोपरि बताया।
पूर्व सैनिक ने कहा कि “वंदे मातरम” का उद्घोष करते ही मन में भारत माता और देश के प्रति गहरा सम्मान स्वतः जागृत हो जाता है। उन्होंने अपने स्कूल जीवन को याद करते हुए बताया कि उनके विद्यालय में प्रतिदिन वंदे मातरम का सामूहिक गायन होता था, जिसने उनके भीतर राष्ट्रसेवा का बीज बोया और आगे चलकर उन्हें भारतीय सेना में शामिल होने की प्रेरणा मिली।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक सैनिक अपने देश को अपनी माता के समान मानता है और उसी भावना के साथ सेवा करता है। सैनिक का जीवन त्याग, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति पर आधारित होता है, जहां व्यक्तिगत हित से पहले देश का हित सर्वोपरि रहता है।
कार्यक्रम की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें लगभग 5 लाख विद्यार्थियों ने एक साथ वंदे मातरम का पूर्ण गायन किया। यह दृश्य देशभक्ति से ओत-प्रोत वातावरण को दर्शाता रहा। पूर्व सैनिक ने सभी शिक्षकों से अपील की कि वे अपने विद्यालयों में नियमित रूप से वंदे मातरम का गायन कराएं, ताकि बच्चों में बचपन से ही देशभक्ति की भावना विकसित हो और वे “देश प्रथम” के विचार को अपने जीवन का मूल मंत्र बनाएं।
इस अवसर पर अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद छत्तीसगढ़ के पदाधिकारी भी उपस्थित रहे, जिनमें कर्नल डॉ. हरिद्र त्रिपाठी (अध्यक्ष), नायक किशोरी लाल साहू (महासचिव), नायक योगेश साहू (प्रांतीय सचिव) तथा हवलदार संतोष साहू (कोषाध्यक्ष) शामिल थे।
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