नवागढ़ क्षेत्र में मिले प्राचीन प्रतिमाओं और पुरातात्विक अवशेषों का होगा विस्तृत सर्वेक्षण, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने विशेषज्ञ दल को निरीक्षण के दिए निर्देश

नवागढ़ क्षेत्र में मिले प्राचीन प्रतिमाओं और पुरातात्विक अवशेषों का होगा विस्तृत सर्वेक्षण, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने विशेषज्ञ दल को निरीक्षण के दिए निर्देश

Ancient Idols Found in Navagarh रायपुर। छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण को लेकर राज्य सरकार ने गंभीरता दिखाते हुए कोंडागांव जिले के नवागढ़ क्षेत्र में मिले प्राचीन पुरातात्विक अवशेषों पर त्वरित संज्ञान लिया है। संस्कृति एवं पुरातत्व मंत्री राजेश अग्रवाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि क्षेत्र में प्राप्त प्राचीन प्रतिमाओं और अन्य अवशेषों का विशेषज्ञ दल के माध्यम से शीघ्र स्थल निरीक्षण और विस्तृत सर्वेक्षण कराया जाए। इस संबंध में पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय संचालनालय, छत्तीसगढ़ को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि कोंडागांव जिले के नवागढ़, कोंडागांव, छत्तीसगढ़ क्षेत्र में 5वीं-6वीं शताब्दी ईस्वी से संबंधित प्राचीन प्रतिमाओं और अन्य अवशेषों की जानकारी सामने आने के बाद इस स्थल का वैज्ञानिक अध्ययन अत्यंत आवश्यक हो गया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि विशेषज्ञ दल क्षेत्र में उपलब्ध सभी प्रतिमाओं, स्थापत्य अवशेषों, शिल्प कलाकृतियों और संभावित पुरातात्विक स्थलों का सूक्ष्म अध्ययन करे तथा उनका विस्तृत दस्तावेजीकरण भी किया जाए, ताकि इन धरोहरों के ऐतिहासिक महत्व का समुचित आकलन किया जा सके।

मंत्री ने कहा कि सर्वेक्षण और स्थल निरीक्षण से प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर आवश्यकतानुसार इन पुरातात्विक अवशेषों के संरक्षण, संवर्धन और सुरक्षा के लिए आवश्यक कार्य प्रारंभ किए जाएंगे। यदि इस स्थल का ऐतिहासिक महत्व प्रमाणित होता है, तो इसे संरक्षित पुरातात्विक स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में भी पहल की जाएगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती प्राचीन सभ्यताओं, स्थापत्य कला और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं से परिपूर्ण रही है और प्रदेश के कई क्षेत्रों में ऐसे महत्वपूर्ण स्थल मौजूद हैं, जिनका व्यवस्थित अध्ययन और संरक्षण किए जाने की आवश्यकता है।

मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार इन धरोहरों की पहचान, संरक्षण और वैज्ञानिक अध्ययन के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, शोधकर्ताओं, इतिहासकारों और आम नागरिकों की सहभागिता भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इन धरोहरों का संरक्षण केवल अतीत को सुरक्षित रखने का प्रयास नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और इतिहास से जोड़ने का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार का उद्देश्य ऐतिहासिक स्थलों और पुरातात्विक धरोहरों को संरक्षण के साथ-साथ अध्ययन, शोध और सांस्कृतिक पर्यटन के दृष्टिकोण से भी विकसित करना है, ताकि छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को व्यापक पहचान मिल सके और स्थानीय स्तर पर पर्यटन तथा रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो सकें।

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