Dhamtari Latest News: नगर निगम के 450 कर्मचारियों की दिवाली फीकी, अक्टूबर की सैलरी अटकी; खाते में 2.14 करोड़ होने का दावा

Dhamtari Latest News: नगर निगम के 450 कर्मचारियों की दिवाली फीकी, अक्टूबर की सैलरी अटकी; खाते में 2.14 करोड़ होने का दावा

Chhattisgarh Dhamtari News: धमतरी। दीपावली का त्योहार नजदीक है, लेकिन नगर निगम के करीब 450 अधिकारी-कर्मचारियों को अब तक अक्टूबर माह का वेतन नहीं मिला है। वेतन भुगतान में देरी के कारण कर्मचारियों की त्योहार की खुशियां फीकी पड़ने की आशंका है। कर्मचारियों का कहना है कि निगम के पास पर्याप्त राशि उपलब्ध होने के बावजूद उनका भुगतान नहीं किया जा रहा है। इसे लेकर कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ रही है।

जानकारी के अनुसार, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में कार्यरत अधिकारी-कर्मचारियों के अक्टूबर माह के वेतन (पेड इन नवंबर 2026) के भुगतान की स्वीकृति प्रदान कर दी है। इसके बावजूद धमतरी नगर निगम में वेतन भुगतान नहीं हो पाया है। कर्मचारियों के मुताबिक, निगम के पास राजस्व वसूली से प्राप्त 17.50 लाख रुपये और अन्य मदों को मिलाकर करीब 2 करोड़ 14 लाख रुपये उपलब्ध हैं। उनका कहना है कि इस राशि से अक्टूबर माह का वेतन आसानी से दिया जा सकता है।

दीपावली में अब महज दो दिन शेष हैं। ऐसे में वेतन नहीं मिलने से कर्मचारियों के सामने त्योहार की खरीदारी और घरेलू खर्चों को लेकर परेशानी खड़ी हो गई है। नवयुक्त अधिकारी-कर्मचारी कल्याण संघ के अध्यक्ष मंगलू निर्मलकर ने बताया कि उनके खाते में दो महीने की पीएफ राशि जमा की गई है, लेकिन अक्टूबर माह का वेतन अब तक नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि वेतन भुगतान की मांग को लेकर शाम को महापौर और निगम आयुक्त से मुलाकात की जाएगी। संघ की ओर से दीपावली से पहले सभी अधिकारी-कर्मचारियों का वेतन जारी करने की मांग की जाएगी।

गौरतलब है कि धमतरी नगर निगम में करीब 200 नियमित और 250 प्लेसमेंट कर्मचारी कार्यरत हैं। इन कर्मचारियों के माध्यम से निगम के विभिन्न प्रशासनिक और मैदानी कार्य संचालित होते हैं। इसके अलावा निगम पार्षदों और एल्डरमैन को भी सितंबर माह तक का ही मानदेय दिए जाने की जानकारी सामने आई है। कर्मचारियों का कहना है कि वेतन में देरी के कारण उन्हें किस्तों और दूसरी देनदारियों का भुगतान करने में भी परेशानी होती है। कई बार समय पर किस्त जमा नहीं होने से अतिरिक्त ब्याज चुकाना पड़ता है।


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