Bilaspur Latest News: विवाह का वादा टूटने पर हर मामले में रेप का आरोप नहीं बनता, हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले में दखल से किया इनकार

Bilaspur Latest News: विवाह का वादा टूटने पर हर मामले में रेप का आरोप नहीं बनता, हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले में दखल से किया इनकार

Chhattisgarh Bilaspur News: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक मामले में स्पष्ट किया है कि केवल शादी का वादा पूरा नहीं होने से हर स्थिति में शारीरिक संबंध को दुष्कर्म नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने आरोपी को बरी करने के विचारण न्यायालय के फैसले को सही ठहराते हुए पीड़िता की अपील खारिज कर दी। जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास और जस्टिस सुधीर कुमार की खंडपीठ ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर विचारण न्यायालय के इस निष्कर्ष में कोई त्रुटि नहीं है कि संबंध पीड़िता की सहमति से बने थे। ऐसे में आरोपी को बरी करने के फैसले में हस्तक्षेप करने का आधार नहीं है।

मामले के अनुसार, पीड़िता का वर्ष 2020 में तलाक हो गया था। जून 2021 में जगदलपुर के एक संगीत समूह से जुड़ने के दौरान उसकी मुलाकात हिमांशु झा से हुई। आरोप है कि हिमांशु ने अपनी पत्नी की मृत्यु होने की बात बताकर पीड़िता के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा और परिवार की सहमति लेकर शादी करने का भरोसा दिलाया। पीड़िता का आरोप था कि 10 अगस्त 2021 से 11 अप्रैल 2024 के बीच शादी का वादा कर आरोपी ने उसके साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए।

पीड़िता ने दिसंबर 2023 में भी पुलिस से शिकायत की थी, लेकिन आरोपी के शादी करने का आश्वासन देने पर उसने उस समय एफआईआर दर्ज नहीं कराई। बाद में आरोपी ने शादी करने से इनकार कर दिया। इसके बाद पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(एन), 323 और 506 के तहत अपराध दर्ज किया।

विचारण न्यायालय ने मामले में पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर आरोपी हिमांशु झा को बरी कर दिया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए पीड़िता की ओर से अपील दायर की गई। अपील में तर्क दिया गया कि विचारण न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों का उचित मूल्यांकन नहीं किया। राज्य की ओर से अधिवक्ता शैलेंद्र शर्मा ने भी अभियोजन पक्ष का समर्थन किया।

हाईकोर्ट ने पीड़िता के बयानों और मामले के अन्य साक्ष्यों का परीक्षण किया। कोर्ट ने पाया कि पीड़िता ने अपने बयान में स्वीकार किया था कि आरोपी के साथ पहली बार शारीरिक संबंध जबरदस्ती नहीं बनाए गए थे। दोनों के बीच करीब दो से तीन वर्ष तक संबंध रहे। इन परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए खंडपीठ ने विचारण न्यायालय के फैसले को सही माना और पीड़िता की अपील खारिज कर दी।


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