Chhattisgarh Raigarh News: रायगढ़। वित्त मंत्री ओपी चौधरी की ओर से कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन को लेकर शून्य पर की गई टिप्पणी के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। जिला कांग्रेस कमेटी रायगढ़ के पूर्व अध्यक्ष अनिल शुक्ला ने वित्त मंत्री पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि चुनावी उपहास के लिए शून्य का इस्तेमाल करना भारतीय वैज्ञानिक विरासत और महान गणितज्ञ आर्यभट्ट के योगदान को कमतर आंकने जैसा है। उन्होंने कहा कि शून्य किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं, बल्कि पूरी मानव सभ्यता की महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
अनिल शुक्ला ने कहा कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक सहित विभिन्न राज्यों के चुनावी परिणामों को लेकर ओपी चौधरी लगातार बयान दे रहे हैं। चुनावी नतीजों की समीक्षा करना राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन इसके लिए देश की ऐतिहासिक वैज्ञानिक उपलब्धियों को कटाक्ष का माध्यम बनाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि आर्यभट्ट जैसे विद्वानों का योगदान किसी दल विशेष से जुड़ा नहीं है, बल्कि यह भारत की साझा विरासत है।
शुक्ला ने व्यंग्य करते हुए कहा कि यदि भाजपा को कांग्रेस के संदर्भ में शून्य शब्द के इस्तेमाल से इतनी परेशानी है, तो उसे अपने चुनावी आंकड़ों में भी शून्य का उपयोग बंद कर देना चाहिए। भाजपा जब 10, 20, 50 और 100 जैसे आंकड़ों का उल्लेख करती है, तब उन संख्याओं से शून्य हटाकर देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि शून्य के बिना संख्याओं का वास्तविक मूल्य बदल जाता है। इसी तरह लोकतंत्र में जनता के मतों को नजरअंदाज कर किसी राजनीतिक दल की वास्तविक ताकत का आकलन नहीं किया जा सकता।
कांग्रेस नेता ने भाजपा के राजनीतिक इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी का सफर भी हमेशा सत्ता और बहुमत के आंकड़ों से भरा नहीं रहा है। कई क्षेत्रों में भाजपा को आज भी सीमित जनसमर्थन या शून्य सीटों की स्थिति का सामना करना पड़ता है। ऐसे में कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन पर शून्य को लेकर तंज कसना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनाव में हार और जीत लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा है और कोई भी राजनीतिक दल जनता से बड़ा नहीं है।
अनिल शुक्ला ने कहा कि शून्य गणित की आधारभूत अवधारणा है, जिसके बिना आधुनिक गणना, विज्ञान, तकनीक और आर्थिक व्यवस्था की कल्पना नहीं की जा सकती। आर्यभट्ट जैसे महान विद्वानों की उपलब्धियों का सम्मान करना सभी की जिम्मेदारी है। किसी राजनीतिक दल के चुनावी प्रदर्शन पर टिप्पणी करते समय भारतीय ज्ञान परंपरा को उपहास का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने वित्त मंत्री के पद की जिम्मेदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि उनसे अपेक्षा है कि वे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की हड़ताल, पटवारी संघ की मांगों, किसानों की समस्याओं, बेरोजगार युवाओं के रोजगार, सड़कों की स्थिति, महंगाई और पर्यावरण जैसे मुद्दों पर तथ्यों और तर्कों के साथ अपनी बात रखें। राजनीतिक बयानबाजी के दौरान भाषा की मर्यादा और पद की गरिमा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
शुक्ला ने कहा कि कांग्रेस अपने चुनावी परिणामों का आकलन करने और संगठन में सुधार करने में सक्षम है। पार्टी जनता के बीच जाकर अपना जनाधार मजबूत करने का काम करती रहेगी। उसे अपनी राजनीतिक दिशा तय करने के लिए किसी मंत्री के व्यंग्य की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने ओपी चौधरी से अपनी टिप्पणी पर पुनर्विचार करने, उसे वापस लेने और आर्यभट्ट के योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए माफी मांगने की मांग की।
अनिल शुक्ला ने कहा कि शून्य का आविष्कार किसी राजनीतिक दल के लिए नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के लिए महत्वपूर्ण रहा है। चुनावी आंकड़ों में शून्य किसी दल की स्थिति दर्शा सकता है, लेकिन उसका वैज्ञानिक और ऐतिहासिक महत्व इससे कहीं बड़ा है। उन्होंने कहा कि शून्य का सम्मान करना भारत के वैज्ञानिक गौरव और ज्ञान परंपरा का सम्मान करना है।

