Chhattisgarh Raipur News: रायपुर। छत्तीसगढ़ में अनुकंपा नियुक्ति की वर्तमान व्यवस्था को समाप्त किए जाने की संभावित तैयारी की खबरों के बीच कर्मचारी-अधिकारी संगठनों ने विरोध जताया है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने कहा है कि शासकीय सेवाकाल के दौरान किसी कर्मचारी या अधिकारी की आकस्मिक मृत्यु होने पर उसके आश्रित परिवार को अनुकंपा नियुक्ति देना मानवीय सहायता का माध्यम है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि शासन ने इस व्यवस्था को समाप्त करने या कमजोर करने का निर्णय लिया, तो प्रदेशभर में चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।
फेडरेशन के अनुसार, राज्य गठन के बाद से शासकीय सेवाकाल में कर्मचारी या अधिकारी की मृत्यु होने पर पात्र आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति देने की व्यवस्था लागू है। संगठन का कहना है कि कर्मचारी की मृत्यु के बाद परिवार के सामने आय का प्रमुख स्रोत समाप्त हो जाता है। ऐसे कठिन समय में अनुकंपा नियुक्ति परिवार को आर्थिक संकट से उबारने और आत्मनिर्भर बनाने में मदद करती है।
कर्मचारी संगठनों ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति की व्यवस्था को समाप्त करने से प्रभावित परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक और सामाजिक चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। फेडरेशन ने इसे कर्मचारी हितों और शासन की संवेदनशीलता से जुड़ा विषय बताते हुए कहा कि इस संबंध में किसी भी प्रस्ताव पर आगे बढ़ने से पहले कर्मचारी संगठनों से चर्चा की जानी चाहिए।
छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने स्पष्ट किया है कि यदि शासन अनुकंपा नियुक्ति व्यवस्था समाप्त करने या उसे कमजोर करने का फैसला लेता है, तो कर्मचारी-अधिकारी संगठन एकजुट होकर विरोध करेंगे। संगठन के मुताबिक, आंदोलन मंत्रालय से लेकर प्रदेश के अंतिम छोर तक चलाया जाएगा। हालांकि, फिलहाल व्यवस्था समाप्त करने को लेकर शासन की ओर से किसी आधिकारिक निर्णय की जानकारी प्रेस विज्ञप्ति में नहीं दी गई है। विरोध का आधार शासन स्तर पर प्रस्ताव पर विचार किए जाने की मिली जानकारी है।
फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा, मंत्रालयीन कर्मचारी संघ के अध्यक्ष चंद्रकांत पाण्डेय, तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के अध्यक्ष पवन कुमार शर्मा, चंद्रशेखर तिवारी, लिपिक वर्ग के प्रांतीय अध्यक्ष रोहित एवं संजय सिंह तथा विभागाध्यक्ष कर्मचारी संघ के अध्यक्ष जय कुमार साहू सहित विभिन्न कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री और शासन से मांग की है कि अनुकंपा नियुक्ति की मौजूदा व्यवस्था को समाप्त करने के बजाय इसे और सरल एवं प्रभावी बनाया जाए।
कमल वर्मा ने कहा कि किसी कर्मचारी की आकस्मिक मृत्यु के बाद उसके परिवार को आर्थिक सहारा देना जरूरी है। कर्मचारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि अनुकंपा नियुक्ति व्यवस्था समाप्त करने का निर्णय लिया गया, तो इसे कर्मचारी जगत के लिए काला अध्याय माना जाएगा और व्यापक विरोध किया जाएगा।

