Chhattisgarh News: पर्यटन से बदलेगी गांवों की तस्वीर, साय सरकार की पहल से ग्रामीणों को मिलेगा रोजगार और स्वरोजगार का अवसर

Chhattisgarh News: पर्यटन से बदलेगी गांवों की तस्वीर, साय सरकार की पहल से ग्रामीणों को मिलेगा रोजगार और स्वरोजगार का अवसर

Chhattisgarh News: रायपुर: छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध जनजातीय संस्कृति और ग्रामीण परंपराओं को देश-दुनिया तक पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार पर्यटन को ग्रामीण सशक्तिकरण का माध्यम बनाने की दिशा में काम कर रही है। सरकार ने पर्यटन को उद्योग का दर्जा देने के साथ जनजातीय क्षेत्रों में होमस्टे को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ होमस्टे नीति तैयार की है। इसके अलावा ग्रामीण पर्यटन, लोककला, हस्तशिल्प और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण में योगदान देने वाले लोगों और संस्थाओं को प्रोत्साहित करने के लिए ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ की शुरुआत की गई है।

इन पहलों का उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना है। इससे बस्तर और सरगुजा सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में पर्यटन की संभावनाओं को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार

छत्तीसगढ़ सरकार ने ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वाले लोगों और संस्थाओं को सम्मानित करने के लिए ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ शुरू किया है। यह पुरस्कार बस्तर के प्रसिद्ध ‘टाइगर बॉय’ चेन्दरू मंडावी की स्मृति में शुरू किया गया है, जिन्होंने बाघ ‘टेंबू’ के साथ अपनी दोस्ती और स्वीडिश फिल्म ‘जंगल सागा’ के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल की थी।

‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार नियम 2025’ के तहत ग्रामीण पर्यटन, लोककला, हस्तशिल्प और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण में योगदान देने वाले जमीनी स्तर के नायकों और संस्थाओं को एक लाख रुपये की नकद राशि तथा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किए जाने का प्रावधान है। छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय ज्यूरी पुरस्कार के लिए चयन करेगी। विजेताओं को राज्योत्सव के मंच पर सम्मानित करने के साथ उनके कार्यों पर आधारित सचित्र स्मारिका भी जारी की जाएगी।

होमस्टे नीति से ग्रामीण परिवारों की बढ़ेगी आय

ग्रामीण पर्यटन को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ होमस्टे नीति 2025-30 तैयार की है। इसके तहत ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों के परिवार अपने घरों को होमस्टे के रूप में विकसित कर पर्यटकों को ठहरने की सुविधा दे सकेंगे। इससे स्थानीय परिवारों को अतिरिक्त आय और स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे।

होमस्टे में ठहरने वाले पर्यटक स्थानीय खान-पान, लोककला, हस्तशिल्प, जनजातीय परंपराओं और ग्रामीण जीवनशैली को करीब से जान सकेंगे। वे पारंपरिक भोजन का स्वाद लेने के साथ खेत-खलिहान और गांव के प्राकृतिक वातावरण का अनुभव भी कर पाएंगे।

नीति के तहत नए होमस्टे की स्थापना और मौजूदा मकानों के उन्नयन के लिए वित्तीय सहायता देने के साथ संचालकों को आतिथ्य सत्कार, स्वच्छता और व्यवसाय संचालन का प्रशिक्षण देने का प्रावधान भी किया गया है। इससे ग्रामीण परिवारों, महिला स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय कारीगरों को आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है।

पर्यटन को उद्योग का दर्जा, निवेश और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

राज्य सरकार ने नई औद्योगिक नीति 2024-30 में पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया है। इसके माध्यम से पर्यटन क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने और पर्यटन सुविधाओं का विस्तार करने पर जोर दिया जा रहा है। नीति के तहत पात्र पर्यटन परियोजनाओं को पूंजी निवेश पर विभिन्न रियायतें और सुविधाएं देने का प्रावधान किया गया है।

सरकार का लक्ष्य सरगुजा से बस्तर और ग्रामीण अंचलों से शहरी क्षेत्रों तक पर्यटन की संभावनाओं को विकसित करना है। इसके लिए सड़क संपर्क, ठहरने की सुविधाओं, परिवहन और पर्यटक सेवाओं को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। बेहतर आधारभूत संरचना विकसित होने से प्रदेश में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।

स्थानीय युवाओं के लिए बनेंगे पर्यटन उद्यमी बनने के अवसर

पर्यटन क्षेत्र के विस्तार से ग्रामीण युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार शुरू करने के अवसर मिल सकते हैं। नई औद्योगिक नीति के तहत पर्यटन संबंधी आधारभूत संरचना, इको-टूरिज्म और होमस्टे विकसित करने वाले पात्र युवाओं एवं स्वयं सहायता समूहों को पूंजीगत सब्सिडी, ब्याज अनुदान और सिंगल-विंडो क्लीयरेंस जैसी सुविधाएं देने का प्रावधान है।

इसके साथ ही ग्रामीण युवाओं को आतिथ्य सत्कार, टूर गाइडिंग और डिजिटल मार्केटिंग का प्रशिक्षण देने पर भी जोर दिया जा रहा है। इससे वे स्थानीय पर्यटन स्थलों को प्रचारित करने, पर्यटकों को सुविधाएं उपलब्ध कराने और अपने क्षेत्र में पर्यटन आधारित व्यवसाय शुरू करने में सक्षम हो सकेंगे।

बस्तर दशहरा और जनजातीय संस्कृति से बढ़ेगा पर्यटन आकर्षण

छत्तीसगढ़ का बस्तर क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों, पहाड़ों, जलप्रपातों और समृद्ध जनजातीय संस्कृति के लिए जाना जाता है। यहां का विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा भी पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। लगभग 75 दिनों तक चलने वाले इस पारंपरिक आयोजन में देश-विदेश से पर्यटकों के पहुंचने की संभावना रहती है।

राज्य सरकार ग्रामीण पर्यटन और होमस्टे जैसी पहलों के माध्यम से बस्तर की सांस्कृतिक विरासत तथा स्थानीय जीवनशैली को व्यापक पहचान दिलाने की दिशा में प्रयास कर रही है। इससे स्थानीय परंपराओं के संरक्षण के साथ ग्रामीण परिवारों को पर्यटन से जोड़ने का अवसर मिलेगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पर्यटन क्षेत्र में निवेश और आधारभूत सुविधाओं के विकास को स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसरों से जोड़ने पर जोर दिया है। राज्य सरकार की इन पहलों से छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में पर्यटन आधारित आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।


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