Chhattisgarh Balrampur News: बलरामपुर। छत्तीसगढ़ शासन की ओर से स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन बलरामपुर जिले के रनहत स्थित शासकीय आयुर्वेदिक औषधालय में अव्यवस्था और साफ-सफाई की स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि औषधालय परिसर में जगह-जगह गंदगी, कीचड़ और पानी जमा है, जबकि दवाइयों के रखरखाव की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है।
जानकारी के अनुसार थाना चलगली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इस आयुर्वेदिक औषधालय पर वाशी, चंदौरा, रनहत, चलगली सहित करीब पांच ग्राम पंचायतों के ग्रामीण उपचार के लिए निर्भर हैं। यहां प्रतिदिन लगभग 15 से 20 मरीज सर्दी-खांसी, बुखार, जोड़ों के दर्द और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज के लिए पहुंचते हैं। औषधालय में आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी डॉ. एन. एस. टेकाम सहित कुल चार कर्मचारियों की पदस्थापना बताई गई है।
ग्रामीणों के अनुसार औषधालय के मुख्य गेट के सामने कीचड़ और पानी जमा होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। बुजुर्गों और अन्य मरीजों को इसी रास्ते से होकर औषधालय पहुंचना पड़ता है। परिसर के अंदर और बाहर भी साफ-सफाई की स्थिति खराब होने तथा शौचालय की व्यवस्था बदहाल होने का आरोप लगाया गया है। इससे दुर्गंध और संक्रमण की आशंका को लेकर भी ग्रामीणों ने चिंता जताई है।
सबसे गंभीर आरोप औषधालय में रखी आयुर्वेदिक दवाइयों के रखरखाव को लेकर लगाए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि शासन की ओर से उपलब्ध कराई गई दवाइयां बोरियों में भरकर जमीन पर रखी हुई हैं और कई दवाइयों पर धूल जमा है। कुछ दवाइयों के एक्सपायरी के करीब होने की बात भी कही गई है। हालांकि, दवाइयों की वास्तविक स्थिति और उनकी वैधता की पुष्टि विभागीय जांच के बाद ही हो सकेगी।
मामले में प्रभारी अधिकारी डॉ. एन. एस. टेकाम से पक्ष जानने का प्रयास किया गया। आरोप है कि उन्होंने कैमरे पर इस संबंध में बयान देने से इनकार कर दिया और कहा कि इस मामले में वह कुछ नहीं बोलेंगे। वहीं, जिला आयुर्वेद अधिकारी अरविंद कुमार शर्मा ने जानकारी संज्ञान में आने की बात कही है। उन्होंने कहा कि मामले की स्वयं जांच कराई जाएगी और यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी लापरवाह पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर बलरामपुर और जिला आयुर्वेद अधिकारी से तत्काल जांच टीम भेजकर औषधालय की व्यवस्थाओं की जांच कराने और आवश्यक सुधार कराने की मांग की है। अब विभागीय जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि औषधालय में साफ-सफाई, मरीजों की सुविधाओं और दवाइयों के रखरखाव में कितनी लापरवाही हुई है।

