Vladimir Putin Visit India: PM मोदी-पुतिन की अहम बैठक पर दुनिया की नजर, क्रूड से लेकर रक्षा सौदों तक कई मुद्दों पर होगी चर्चा

Vladimir Putin Visit India: PM मोदी-पुतिन की अहम बैठक पर दुनिया की नजर, क्रूड से लेकर रक्षा सौदों तक कई मुद्दों पर होगी चर्चा

Vladimir Putin Visit India: नई दिल्ली। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत दौरे पर आ रहे हैं। हालांकि, उनकी यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव 11 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ होने वाली द्विपक्षीय बैठक होगी। इस बैठक पर भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच क्रूड ऑयल, व्यापार, रक्षा, निवेश और रणनीतिक सहयोग समेत कई अहम मुद्दों पर बातचीत हो सकती है।

भारत और रूस के बीच लंबे समय से मजबूत रणनीतिक संबंध रहे हैं। ऐसे में पुतिन की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच संबंधों को नई दिशा देने वाले कुछ महत्वपूर्ण फैसले और घोषणाएं सामने आने की उम्मीद है।

क्रूड से आगे आर्थिक रिश्ते बढ़ाने पर जोर

मोदी-पुतिन बैठक ऐसे समय हो रही है, जब भारत की ऊर्जा सुरक्षा में रूस से मिलने वाले कच्चे तेल की अहम भूमिका है। वहीं, रूसी तेल की खरीद को लेकर भारत पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव भी बढ़ा है। भारत लगातार स्पष्ट करता रहा है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए तेल खरीद से जुड़े फैसले करेगा।

ऐसे में दोनों देशों की कोशिश आर्थिक साझेदारी को सिर्फ क्रूड ऑयल की खरीद तक सीमित रखने के बजाय व्यापार और निवेश के दूसरे क्षेत्रों तक विस्तार देने की हो सकती है। बैठक में द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने, आपसी निवेश को प्रोत्साहित करने और स्थानीय मुद्राओं में कारोबार को बढ़ावा देने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा संभव है।

75 सुखोई-57 की डील पर टिकी नजर

रक्षा क्षेत्र भी मोदी और पुतिन की बैठक के प्रमुख एजेंडे में शामिल हो सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत रूस से 75 सुखोई-57 स्टील्थ फाइटर जेट खरीदने के प्रस्ताव पर आगे बढ़ सकता है। संभावित सौदे की कीमत करीब एक लाख करोड़ रुपये तक बताई जा रही है। सुखोई-57 रूस का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान है। यदि इस सौदे को अंतिम रूप दिया जाता है तो यह भारत की वायु शक्ति के लिहाज से एक बड़ा रक्षा समझौता होगा।

इसके अलावा दोनों देशों के बीच संयुक्त रक्षा उत्पादन और तकनीकी सहयोग को बढ़ाने पर भी महत्वपूर्ण घोषणा हो सकती है। भारत लगातार रक्षा उपकरणों के स्थानीय उत्पादन और अत्याधुनिक तकनीक के हस्तांतरण पर जोर दे रहा है। ऐसे में रूस के साथ संयुक्त रक्षा उत्पादन इस दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है।

S-400 की पांचवीं यूनिट की सप्लाई पर भी चर्चा

बैठक में भारत को मिलने वाले S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की बाकी सप्लाई का मुद्दा भी उठ सकता है। भारत ने रूस के साथ करीब 5.43 अरब डॉलर में पांच S-400 सिस्टम खरीदने का समझौता किया था। इनमें से चार सिस्टम भारत को मिल चुके हैं, जबकि पांचवीं यूनिट की सप्लाई अभी बाकी है। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच इस बैठक में पांचवें S-400 सिस्टम की डिलीवरी को लेकर भी बातचीत होने की संभावना है।

परमाणु पनडुब्बी सहयोग भी एजेंडे में

भारत और रूस के बीच परमाणु पनडुब्बी से जुड़े सहयोग पर भी चर्चा हो सकती है। भारत रूस से परमाणु पनडुब्बी के लिए अधिक शक्तिशाली 112 मेगावाट क्षमता वाले रिएक्टर की तकनीक हासिल करने में रुचि रखता है। इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच पहले से बातचीत चल रही है। ऐसे में मोदी-पुतिन वार्ता में रक्षा और परमाणु तकनीक से जुड़े सहयोग को आगे बढ़ाने के रास्ते तलाशे जा सकते हैं।

बिश्केक मुलाकात में दिखी थी दोनों नेताओं की खास बॉन्डिंग

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और व्लादिमीर पुतिन की बिश्केक में मुलाकात हुई थी। उस दौरान दोनों नेताओं के बीच खास बॉन्डिंग देखने को मिली थी। अब भारत में होने वाली इस बैठक को दोनों देशों के पारंपरिक रणनीतिक रिश्तों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कुल मिलाकर, मोदी-पुतिन वार्ता में ऊर्जा और व्यापार से लेकर रक्षा, निवेश और तकनीकी सहयोग तक कई बड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। ऐसे में 11 सितंबर की यह बैठक भारत-रूस संबंधों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


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