Chhattisgarh Bilaspur News: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव में उम्र को लेकर अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि आधार कार्ड और वोटर आईडी में दर्ज जन्मतिथि को उम्र का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने जन्मतिथि निर्धारित करने के लिए मान्यता प्राप्त बोर्ड के मैट्रिक प्रमाणपत्र और स्कूल रिकॉर्ड को अधिक विश्वसनीय माना है। कोर्ट ने 21 वर्ष की न्यूनतम उम्र पूरी नहीं होने के आधार पर ग्राम पंचायत कृष्णानगर की सरपंच जसिला तिथियो का चुनाव निरस्त करने के निर्वाचन न्यायाधिकरण के आदेश को बरकरार रखते हुए उनकी रिट याचिका खारिज कर दी।
मामला ग्राम पंचायत कृष्णानगर, जनपद पंचायत बलरामपुर का है। सरपंच जसिला तिथियो की जन्मतिथि कक्षा पहली से लेकर मैट्रिक तक के शैक्षणिक दस्तावेजों में 12 अप्रैल 2004 दर्ज है। इस जन्मतिथि के आधार पर पंचायत चुनाव में नामांकन दाखिल करने के समय उनकी उम्र 21 वर्ष पूरी नहीं हुई थी। जसिला तिथियो, पत्नी रंजीत दास, वार्ड नंबर 10 ग्राम कृष्णानगर, जिला बलरामपुर-रामानुजगंज की निवासी हैं।
जसिला ने सरपंच पद के लिए नामांकन दाखिल किया था, जिसे रिटर्निंग ऑफिसर ने स्वीकार कर लिया। चुनाव मैदान में कुल तीन प्रत्याशी थे और 22 फरवरी 2025 को हुए मतदान में जसिला को सबसे अधिक वैध मत मिले थे। इसके बाद उनकी प्रतिद्वंद्वी प्रत्याशी सूरजपती राम ने निर्वाचन याचिका दायर कर उनकी उम्र पर सवाल उठाया। याचिका में कहा गया कि जसिला की वास्तविक जन्मतिथि 12 अप्रैल 2004 है और नामांकन के समय उनकी उम्र 21 वर्ष से कम थी।
निर्वाचन न्यायाधिकरण ने 25 सितंबर 2025 को याचिका स्वीकार करते हुए जसिला तिथियो का चुनाव शून्य घोषित कर दिया था। इसके बाद जसिला ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान जसिला की ओर से 5 जुलाई 2025 को अपडेट कराया गया जन्म प्रमाणपत्र पेश किया गया, जिसमें उनकी जन्मतिथि 12 अप्रैल 2002 दर्ज थी। हालांकि कोर्ट ने इस दस्तावेज को निर्णायक नहीं माना, क्योंकि यह निर्वाचन याचिका दायर होने के बाद जारी किया गया था।
जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने 7 सितंबर को फैसला सुनाते हुए कहा कि जन्मतिथि निर्धारित करने में जन्म प्रमाणपत्र, मान्यता प्राप्त बोर्ड का मैट्रिक प्रमाणपत्र और स्कूल रिकॉर्ड महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं। कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 243-एफ का हवाला देते हुए कहा कि पंचायत चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार की उम्र कम से कम 21 वर्ष होना जरूरी है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने निर्वाचन न्यायाधिकरण के आदेश को बरकरार रखा और जसिला तिथियो की रिट याचिका खारिज कर दी।

