CG Raipur News: रायपुर। लगातार बारिश के बीच शहर में जलभराव की समस्या से आम लोगों की परेशानी बढ़ गई है। कई मुख्य सड़के जलमग्न होती दिखाई दीं तो कहीं नालों के बाहर निकलता पानी। जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए नगर निगम ने अब नालों पर बने अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। इसी कड़ी में नगर निगम जोन-6 की टीम ने वार्ड-60 में भैरव नगर से बोरिया रोड तक करीब 20 अवैध पाटों को जेसीबी से तोड़कर नाले की सफाई कराई।
नाले पर बने 20 अवैध पाटे तोड़े
महापौर मीनल चौबे और नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा के निर्देश पर की गई कार्रवाई के दौरान नाले पर बने करीब 20 अवैध पाटों को जेसीबी की मदद से ध्वस्त किया गया। कार्रवाई के बाद करीब तीन डंपर मलबा हटाया गया और नाले को कब्जामुक्त कर सफाई कराई गई।
नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक नाले पर बने इन पाटों के कारण सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही थी। मशीनों के नाले तक नहीं पहुंच पाने से गाद और कचरा जमा हो रहा था, जिससे बारिश के दौरान पानी की निकासी में परेशानी हो रही थी।
निगम का दावा- बेहतर होगी पानी की निकासी
जोन कमिश्नर हितेंद्र यादव के निर्देश पर हुई कार्रवाई के दौरान वार्ड पार्षद रमेश सपहा और जोन स्वास्थ्य अधिकारी आदिव्य हजारी भी मौजूद रहे। निगम का दावा है कि अवैध पाटों को हटाने और नाले की सफाई के बाद बारिश के दौरान पानी का बहाव बेहतर होगा और जलभराव की समस्या में राहत मिल सकती है।
क्या सिर्फ अतिक्रमण हटाने से खत्म होगा जलभराव?
हालांकि, शहर में हर साल बारिश के दौरान सामने आने वाली जलभराव की समस्या को देखते हुए यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या कुछ अवैध पाटों को हटाने भर से समस्या का स्थायी समाधान हो जाएगा? नालों की नियमित सफाई, अतिक्रमण के खिलाफ लगातार कार्रवाई, कचरा प्रबंधन और ड्रेनेज सिस्टम को मजबूत करना भी जरूरी है।
यदि कार्रवाई केवल अभियान तक सीमित रही और नालों की नियमित निगरानी व सफाई नहीं हुई, तो कुछ समय बाद हालात फिर बिगड़ सकते हैं। ऐसे में नगर निगम की मौजूदा कार्रवाई से लोगों को कितनी राहत मिलती है, यह आने वाली बारिश में साफ होगा।
स्थायी समाधान के लिए नियमित कार्रवाई जरूरी
रायपुर में बारिश शुरू होते ही जलभराव एक बड़ी चुनौती बन जाता है। निगम ने नालों पर बने अवैध पाटों को हटाकर जरूरी कदम जरूर उठाया है, लेकिन स्थायी राहत के लिए पूरे शहर में नालों से अतिक्रमण हटाने, नियमित सफाई कराने और जल निकासी व्यवस्था को आधुनिक बनाने की जरूरत है। अब देखना होगा कि वार्ड-60 में शुरू हुई यह कार्रवाई केवल एक अभियान बनकर रह जाती है या नगर निगम शहर के अन्य जलभराव वाले इलाकों में भी इसी तरह लगातार कार्रवाई करता है।

