Raipur News : सड़क पर नहीं होगी बहस, कैमरा करेगा फैसला! छत्तीसगढ़ में ई-चालान से यातायात अनुशासन को नई रफ्तार

Raipur News : सड़क पर नहीं होगी बहस, कैमरा करेगा फैसला! छत्तीसगढ़ में ई-चालान से यातायात अनुशासन को नई रफ्तार

Chhattisgarh Raipur News : रायपुर। छत्तीसगढ़ में ई-चालान व्यवस्था लागू होने के बाद यातायात नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई का तरीका तेजी से बदल रहा है। अब वाहन चालकों को रोककर मौके पर चालान काटने के बजाय कैमरों और मोबाइल डिवाइस के जरिए नियम तोड़ने की तस्वीर दर्ज कर वाहन मालिक के नाम सीधे ई-चालान भेजा जा रहा है। इससे कार्रवाई में मानवीय हस्तक्षेप कम हुआ है और सड़क पर होने वाली बहस, विवाद और सिफारिशों का दौर भी काफी हद तक खत्म हुआ है।

रायपुर के जयस्तंभ चौक स्थित आईटीईएमएस यानी इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम कमांड सेंटर से शहर में यातायात गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। कैमरों के जरिए नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों की पहचान की जाती है और उसके आधार पर डिजिटल चालान जारी किया जाता है। इससे कार्रवाई को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने में मदद मिल रही है।

इस व्यवस्था का असर सरकारी आंकड़ों में भी दिखाई दे रहा है। वर्ष 2025 में राज्य में 98 हजार से अधिक ई-चालान जारी किए गए, जिनसे पांच करोड़ रुपये से ज्यादा का समन शुल्क वसूला गया। वहीं वर्ष 2026 में जून तक करीब 42 हजार ई-चालान के जरिए तीन करोड़ रुपये से अधिक की वसूली की जा चुकी है।

यातायात पुलिस अधिकारियों के मुताबिक ई-चालान प्रणाली से सड़क पर चालान को लेकर होने वाले विवादों में कमी आई है। पहले वाहन रोकने के बाद चालान को लेकर बहस, नियमों की व्याख्या और प्रभावशाली लोगों की सिफारिश जैसी स्थितियां सामने आती थीं। अब डिजिटल रिकॉर्ड और कैमरे में दर्ज उल्लंघन के आधार पर कार्रवाई होने से ऐसी परिस्थितियों की गुंजाइश कम हुई है।

डिजिटल निगरानी का एक असर वाहन चालकों के व्यवहार पर भी दिखाई दे रहा है। चालान की संभावना के चलते लोग हेलमेट, सीट बेल्ट और अन्य यातायात नियमों का पालन करने के प्रति पहले से ज्यादा सतर्क हुए हैं। हालांकि, इसके बावजूद सड़क सुरक्षा के मोर्चे पर कई बड़ी चुनौतियां अभी कायम हैं।

तेज रफ्तार को सड़क हादसों की प्रमुख वजहों में शामिल किया जा रहा है। राज्य पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी से अगस्त के बीच करीब 6,500 सड़क हादसों में 2,960 लोगों की मौत हुई, जबकि 5,650 लोग घायल हुए। ऐसे में केवल चालान की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं माना जा सकता।

सड़क हादसों में कमी लाने के लिए ई-चालान के साथ तेज रफ्तार पर प्रभावी नियंत्रण, हेलमेट और सीट बेल्ट की अनिवार्यता, नशे में वाहन चलाने वालों पर सख्त कार्रवाई, ब्लैक स्पॉट में सुधार और बेहतर सड़क इंजीनियरिंग पर भी जोर देना जरूरी है। डिजिटल निगरानी ने नियम तोड़ने वालों तक पहुंच आसान जरूर कर दी है, लेकिन सड़क सुरक्षा की असली चुनौती वाहन चालकों के व्यवहार में स्थायी बदलाव लाना है।


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