Chhattisgarh Durg News: दुर्ग। छत्तीसगढ़ के पहले लोकपर्व हरेली तिहार का आयोजन डुंडेरा में धूमधाम और उत्साह के साथ किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक रूप से कृषि औजारों की पूजा-अर्चना के साथ हुई। इसके बाद छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति को प्रदर्शित करते हुए कर्मा, ददरिया और पंथी नृत्य की प्रस्तुतियां दी गईं।
सांस्कृतिक धरोहर और लोक परंपराओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व मुख्यमंत्री एवं पाटन विधायक भूपेश बघेल शामिल हुए। आयोजन समिति द्वारा उन्हें गाड़ा-बैला में बैठाकर कार्यक्रम स्थल तक पारंपरिक तरीके से ले जाया गया।
इस अवसर पर भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ की जनता को हरेली पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हरेली तिहार प्रकृति और कृषि संस्कृति से जुड़ा महत्वपूर्ण लोकपर्व है। उन्होंने कहा कि हमें अपनी संस्कृति, प्राकृतिक संसाधनों, लोक परंपराओं और बोली-भाषा को सहेजकर रखना चाहिए।
भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार छत्तीसगढ़ की संस्कृति, प्रकृति और बोली-भाषा को खत्म कर रही है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान धीरे-धीरे विलुप्त होने की स्थिति में पहुंच रही है। उन्होंने लोकपर्वों और पारंपरिक परंपराओं को संरक्षित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम में पूर्व गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू, सतीश यादव, पूर्व विधायक प्रतिमा चंद्राकर, कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुकेश चंद्राकर, रामेश्वरी दिवाकर गायकवाड़, डिकेन्द्र हिरवानी, प्रहलाद वर्मा, योगिता चन्द्रकार सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और आयोजन समिति के सदस्य मौजूद रहे। हरेली महोत्सव के संयोजक पवन बंजारे ने कार्यक्रम के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर भूपेश बघेल ने प्रदेशवासियों को हरेली तिहार की शुभकामनाएं दीं और छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति एवं परंपराओं को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का आह्वान किया।

