Bilaspur News: पत्नी साथ रहना चाहती थी, पति ने नहीं किए रिश्ता बचाने के प्रयास; हाईकोर्ट ने बरकरार रखा फैमिली कोर्ट का फैसला

Bilaspur News: पत्नी साथ रहना चाहती थी, पति ने नहीं किए रिश्ता बचाने के प्रयास; हाईकोर्ट ने बरकरार रखा फैमिली कोर्ट का फैसला

Chhattisgarh Bilaspur News: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि बच्चे को अन्य लोग कम छुएं, यह चाह एक मां की अतिरिक्त संवेदनशीलता हो सकती है, लेकिन इसे मानसिक क्रूरता नहीं माना जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि पति-पत्नी के बीच सामान्य मतभेद, छोटी-मोटी कहासुनी या स्वभाव में अंतर तलाक का आधार नहीं बन सकते। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने पति की तलाक याचिका खारिज करते हुए फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने रायपुर निवासी एक व्यक्ति की अपील पर सुनवाई करते हुए कहा कि विवाह विच्छेद तभी संभव है, जब मानसिक क्रूरता के आरोप गंभीर हों और उन्हें ठोस साक्ष्यों से सिद्ध किया जा सके।

पति ने लगाए थे मानसिक क्रूरता और परित्याग के आरोप

मामले में दंपती का विवाह 6 दिसंबर 2014 को हुआ था और उनके दो बच्चे हैं। पारिवारिक विवाद के बाद पत्नी दोनों बच्चों के साथ मायके चली गई। पति ने फैमिली कोर्ट में पत्नी पर मानसिक क्रूरता और परित्याग का आरोप लगाते हुए तलाक की मांग की। उसका कहना था कि पत्नी ननदों के साथ नहीं रहना चाहती थी, रिश्तेदारों के प्रति उसका व्यवहार ठीक नहीं था और वह आत्महत्या की धमकी देती थी।

हालांकि, फैमिली कोर्ट ने पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर तलाक की याचिका खारिज कर दी, जिसके खिलाफ पति ने हाईकोर्ट में अपील की थी।

पत्नी ने साथ रहने की जताई इच्छा

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि पत्नी ने पहले हाथ की नस काटने की घटना पर अपनी गलती स्वीकार की थी और शपथपत्र देकर भविष्य में ऐसा न करने तथा पति के साथ सुखपूर्वक रहने की इच्छा भी व्यक्त की थी। अदालत ने कहा कि इससे यह साबित नहीं होता कि पत्नी वैवाहिक संबंध खत्म करना चाहती थी या उसके मन में पति के प्रति कोई दुर्भावना थी।

पति ने रिश्ता बचाने के लिए नहीं किए ठोस प्रयास

अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड से यह भी साबित नहीं हुआ कि पत्नी ने पति का परित्याग किया। इसके विपरीत, वह लगातार पति के साथ रहने की इच्छा जताती रही, जबकि पति ने उसे वापस लाने या वैवाहिक संबंध सुधारने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किया। ऐसे में मानसिक क्रूरता और परित्याग के आरोप सिद्ध नहीं होते, इसलिए पति की तलाक अपील खारिज कर दी गई।


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