राजनांदगांव। जिले में अवैध कारोबार को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। स्थानीय लोगों और सूत्रों के अनुसार, जहां छोटे स्तर के अवैध कारोबारियों पर त्वरित कार्रवाई की जा रही है, वहीं बड़े स्तर पर संचालित अवैध धंधों पर अपेक्षित सख्ती नजर नहीं आ रही।
नेशनल हाईवे पर खुलेआम अवैध गतिविधियों के आरोप
शिकायतों के मुताबिक, नेशनल हाईवे किनारे स्थित कुछ ढाबों में कथित रूप से शराब, गांजा और पेट्रोल-डीजल जैसे ज्वलनशील पदार्थों की अवैध बिक्री हो रही है। इसके अलावा कबाड़ से जुड़े सामानों का भी अवैध लेन-देन होने की बात सामने आई है।
मिलीभगत या लापरवाही?
स्थानीय चर्चाओं में यह आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि बड़े अवैध कारोबारियों पर कार्रवाई नहीं होने के पीछे पुलिस की लापरवाही या कथित मिलीभगत हो सकती है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार उठ रहे सवालों ने व्यवस्था की पारदर्शिता पर संदेह खड़ा कर दिया है।
वरिष्ठ अधिकारियों के नाम का हवाला
सूत्रों का कहना है कि कुछ अवैध कारोबारी कार्रवाई से बचने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का नाम लेकर भय का माहौल बनाते हैं, जिससे आम लोगों में भ्रम और डर की स्थिति बन रही है।
पुलिस की छवि पर असर
इन आरोपों के चलते पुलिस की निष्पक्षता और कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। महिला सुरक्षा और कानून व्यवस्था को लेकर बनी सकारात्मक छवि पर भी इसका असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
जनता की मांग-समान कार्रवाई हो
नागरिकों ने पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा और जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और छोटे-बड़े सभी अवैध कारोबारियों पर समान रूप से सख्त कार्रवाई की जाए।
बड़ा सवाल
क्या कानून सबके लिए बराबर है,
या फिर बड़े रसूखदारों के सामने कार्रवाई ठहर जाती है?
अब जिले की नजर प्रशासन और पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी है-क्या वाकई “बड़ी मछलियों” पर शिकंजा कसेगा या कार्रवाई छोटे स्तर तक ही सीमित रहेगी?

