छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पर डॉ. पुरुषोत्तम चंद्राकर का समर्थन, कहा- सामाजिक समरसता और धार्मिक स्वतंत्रता संतुलन के लिए अहम कदम

छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पर डॉ. पुरुषोत्तम चंद्राकर का समर्थन, कहा- सामाजिक समरसता और धार्मिक स्वतंत्रता संतुलन के लिए अहम कदम

CG Religion Freedom Bill रायपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 के पारित होने पर डॉ. पुरुषोत्तम चंद्राकर ने आभार व्यक्त करते हुए इसका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक राज्य में सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक संरक्षण और धार्मिक स्वतंत्रता के संतुलन को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


डॉ. चंद्राकर ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी विविधता, परंपराओं और सामाजिक संरचना से जुड़ी है, जहां आस्था केवल व्यक्तिगत विषय नहीं, बल्कि सामाजिक जीवन का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में धर्मांतरण से जुड़े कई विवाद सामने आए, जिनमें प्रलोभन, दबाव या अनुचित प्रभाव की आशंकाएं जताई गईं, जिससे सामाजिक तनाव और विभाजन की स्थिति बनी।


उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया को स्पष्ट विधिक ढांचे में लाना आवश्यक था, ताकि वास्तविक धार्मिक स्वतंत्रता सुरक्षित रह सके और उसके दुरुपयोग को रोका जा सके। नए विधेयक में बल, प्रलोभन और अनुचित प्रभाव के माध्यम से किए गए धर्मांतरण को अवैध मानते हुए दंडात्मक प्रावधान किए गए हैं, जो विशेष रूप से कमजोर वर्गों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं।


डॉ. चंद्राकर ने स्पष्ट किया कि यह विधेयक किसी भी धर्म या आस्था के विरोध में नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करता है कि आस्था परिवर्तन पूर्णतः स्वैच्छिक, स्वतंत्र और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत हो। उन्होंने कहा कि पूर्व सूचना और पुष्टि जैसी व्यवस्थाएं प्रक्रिया को जवाबदेह और स्पष्ट बनाती हैं।


प्रेस वार्ता में खोड्स राम कश्यप, यशवंत सिंह वर्मा, ललित कांकड़े, सुनील नायक सहित समाज के अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने इस विधेयक का समर्थन करते हुए उम्मीद जताई कि इससे प्रदेश में सामाजिक संतुलन, सांस्कृतिक विरासत और आपसी सौहार्द को मजबूती मिलेगी।


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