Delhi Latest News: दिल्ली में रहने वाले लाखों प्रवासी मजदूरों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। अक्सर काम की तलाश में दूसरे राज्यों से दिल्ली आने वाले मजदूरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती रसोई गैस कनेक्शन की होती है। एड्रेस प्रूफ या रेगुलर कनेक्शन न होने के कारण उन्हें खाना पकाने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है। लेकिन अब दिल्ली सरकार के खाद्य, आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग ने इस समस्या का समाधान निकाल लिया है।
शुक्रवार को आयोजित एक प्रेस वार्ता में विभाग ने स्पष्ट किया कि राहत उपाय के तौर पर अब कोई भी प्रवासी मजदूर बिना किसी रेगुलर एलपीजी कनेक्शन के भी सिलेंडर प्राप्त कर सकता है। इसके लिए उन्हें केवल अपना आधार कार्ड या कोई भी वैध पहचान पत्र दिखाना होगा। इसके बाद उन्हें 5 किलोग्राम वाला छोटा सिलेंडर तुरंत उपलब्ध करा दिया जाएगा। इस फैसले से उन लोगों को सबसे ज्यादा फायदा होगा जो किराए के कमरों में रहते हैं और जिनके पास पते का स्थायी प्रमाण नहीं है।
दिल्ली में ऊर्जा का कोई संकट नहीं
प्रेस वार्ता के दौरान विभाग के एडिशनल कमिश्नर अरुण कुमार झा ने जनता को आश्वस्त किया कि दिल्ली में ईंधन या ऊर्जा का कोई संकट नहीं है। उन्होंने कहा कि राजधानी में एलपीजी, पीएनजी, पेट्रोल और डीजल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। किसी भी प्रकार की कालाबाजारी या किल्लत की जानकारी लेने और शिकायतों के निपटारे के लिए सरकार ने एक विशेष कंट्रोल रूम भी स्थापित किया है, जो हर स्थिति पर पैनी नजर रखेगा।
PNG अपनाने पर सरकार का जोर
सरकार अब रसोई गैस के लिए पाइपलाइन (PNG) के विस्तार पर तेजी से काम कर रही है। विभाग ने आग्रह किया है कि जिन इलाकों में पीएनजी की सुविधा उपलब्ध है, वहां के निवासी जल्द से जल्द एलपीजी छोड़कर पीएनजी कनेक्शन अपना लें। पहले जहां हर दिन 1,000 नए कनेक्शन जोड़े जा रहे थे, अब उस लक्ष्य को बढ़ाकर 3,000 प्रतिदिन कर दिया गया है। विभाग ने संकेत दिया है कि यदि पीएनजी उपलब्ध होने के बावजूद लोग इसे नहीं अपनाते हैं, तो भविष्य में उनके एलपीजी कनेक्शन की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है।
कनेक्शन की सही श्रेणी सुनिश्चित करें
दिल्ली में वर्तमान में लगभग 56 लाख घरेलू एलपीजी कनेक्शन हैं। विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे यह सुनिश्चित करें कि उनका कनेक्शन सही कैटेगरी में रजिस्टर्ड हो। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि घरेलू गैस के व्यावसायिक दुरुपयोग को रोका जा सके और जरूरतमंदों तक सब्सिडी का लाभ सही तरीके से पहुंच सके।

