रात में मछुआरे, दिन में खिलाड़ी: अब्दुल फताह ने लक्षद्वीप के लिए खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में गोल्ड मेडल जीता

रात में मछुआरे, दिन में खिलाड़ी: अब्दुल फताह ने लक्षद्वीप के लिए खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में गोल्ड मेडल जीता

Khelo India Tribal Games 2026: रायपुर। लक्षद्वीप के अमीनी द्वीप के 18 वर्षीय लॉन्ग जम्पर अब्दुल फताह ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में 7.03 मीटर की अपनी करियर की सर्वश्रेष्ठ छलांग लगाकर गोल्ड मेडल जीतकर केंद्र शासित प्रदेश के खेल इतिहास में नया अध्याय लिखा। फताह का यह जीत लक्षद्वीप के लिए ऐतिहासिक क्षण साबित हुई।

अब्दुल फताह रात को अपने परिवार के लिए मछली पकड़ते हैं और दिन में ट्रेनिंग ग्राउंड पर लॉन्ग जंप और 100 मीटर स्प्रिंट की कड़ी तैयारी करते हैं। मछुआरे परिवार में जन्मे फताह ने अपनी पढ़ाई 12वीं कक्षा के बाद आर्थिक परिस्थितियों के कारण बीच में ही छोड़ दी थी और खेल को अपने जुनून के रूप में अपनाया।

फताह ने बताया, “स्कूल के समय से मैं अपने पिता की मछली पकड़ने में मदद करता रहा हूँ। सुबह ट्रेनिंग के लिए जाता हूँ और परिवार को इसका पता है, भले ही वे खेल के बारे में ज्यादा न समझें।”

उनकी खेल यात्रा फुटबॉल से शुरू हुई, लेकिन स्थानीय प्रतियोगिताओं में उनके कोच मोहम्मद कासिम ने उनकी दौड़ने की प्रतिभा देखी और उन्हें एथलेटिक्स में आने का सुझाव दिया। इसके बाद फताह ने लॉन्ग जंप और स्प्रिंट में प्रशिक्षण शुरू किया। अमिनी एथलेटिक्स एसोसिएशन ने उन्हें और अन्य युवा एथलीटों को व्यवस्थित ट्रेनिंग देने का अवसर प्रदान किया।

फताह की 7.03 मीटर की जंप उनकी नियमित 6.5-6.7 मीटर की ट्रेनिंग के हिसाब से विशेष उपलब्धि मानी जा रही है। उन्होंने कहा, “खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में लक्ष्य 7.15 मीटर तक पहुंचने का था, लेकिन सात मीटर पार करना भी मेरे लिए बड़ी प्रेरणा है।”

लक्षद्वीप की खेल यात्रा मुबस्सिना मोहम्मद जैसे एथलीटों के कारण पहले से ही चर्चा में रही है। 19 वर्षीय मुबस्सिना ने 2022 एशियन U18 चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता और जूनियर नेशनल टाइटल हासिल किया।

फताह और अन्य एथलीटों को अब भी सीमित संसाधनों में ट्रेनिंग करनी पड़ती है। लक्षद्वीप में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है, इसलिए अधिकांश खिलाड़ी मिट्टी के ट्रैक या फुटबॉल मैदान में प्रैक्टिस करते हैं। फताह का कहना है, “हमारी सफलता के कारण उम्मीद है कि हमें बेहतर ट्रेनिंग सुविधाएँ और अवसर मिलेंगे।”

अब्दुल फताह की मेहनत, समर्पण और संघर्ष ने साबित किया कि सीमित संसाधनों में भी उत्साह और जुनून से सपने पूरे किए जा सकते हैं।


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