इंटर-स्टेट ATM लूट गिरोह के 2 सदस्य गिरफ्तार, UP से आकर दुर्ग और रायपुर में करते थे रेकी, मेटाडोर से मशीन उखाड़ने की कोशिश थी

इंटर-स्टेट ATM लूट गिरोह के 2 सदस्य गिरफ्तार, UP से आकर दुर्ग और रायपुर में करते थे रेकी, मेटाडोर से मशीन उखाड़ने की कोशिश थी

Durg Crime News दुर्ग जिला में एटीएम उखाड़कर चोरी करने की एक बड़ी साजिश का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। इस मामले में इंटर स्टेट गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है, जो उत्तर प्रदेश से आकर प्रदेश में सुनसान इलाकों में एटीएम मशीनों को निशाना बनाते थे। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि गिरोह वारदात से पहले कई दिनों तक इलाके की रेकी करता था और पूरी प्लानिंग के साथ घटना को अंजाम देता था।

घटना 13 नवंबर 2025 की रात करीब 2 बजे नंदिनी नगर थाना क्षेत्र के ग्राम ननकट्ठी बस स्टैंड के पास हुई, जहां आरोपियों ने हिताची कंपनी के एटीएम को तोड़कर उखाड़ने की कोशिश की। हालांकि, आसपास के लोगों के जागने से उनकी योजना विफल हो गई और वे मौके से फरार हो गए। इस मामले में सुपेला निवासी विनय कुमार की शिकायत पर पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू की।

जांच के दौरान सामने आया कि यह एक संगठित अंतरराज्यीय गिरोह का काम है, जिसके सदस्य अलग-अलग राज्यों में एटीएम को निशाना बनाते हैं। वारदात से पहले रायपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में कई दिनों तक रेकी की जाती थी। आरोपियों ने ग्राम गनियारी से एक मेटाडोर वाहन चोरी किया था, जिसका उपयोग एटीएम मशीन को उखाड़ने के प्रयास में किया गया। रस्सियों और अन्य उपकरणों की मदद से मशीन को वाहन से बांधकर खींचने की कोशिश की गई।

तकनीकी साक्ष्यों और अंतरराज्यीय समन्वय के आधार पर पुलिस ने आरोपियों को मध्यप्रदेश के कटनी जिला के माधवनगर थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों में मेरठ निवासी आरिफ उर्फ बाठू और शामली निवासी एहसान उर्फ एहसास शामिल हैं। कोर्ट से प्रोडक्शन वारंट मिलने के बाद दोनों को रिमांड पर लिया गया, जहां उन्होंने अपराध स्वीकार कर लिया।

पूछताछ में आरोपियों ने कई चौंकाने वाले तरीके बताए। वारदात के दौरान वे अपने मोबाइल फोन बंद रखते थे और इंटरनेट कॉलिंग के जरिए संपर्क में रहते थे। सीसीटीवी कैमरों को निष्क्रिय करने के लिए उन पर पेंट या ग्रीस लगा देते थे ताकि फुटेज खराब हो जाए। हर घटना में अलग वाहन का इस्तेमाल करते थे और नंबर प्लेट बदल देते थे, ताकि पहचान से बच सकें।

गिरोह टोल प्लाजा से बचने के लिए वैकल्पिक रास्तों का उपयोग करता था और होटल या ढाबों से दूरी बनाकर अपनी पहचान छिपाता था। रेकी के लिए सदस्य फेरीवाले या ड्राइवर बनकर दूसरे राज्यों में घूमते थे, जिससे किसी को शक न हो। घटना से दो दिन पहले आरोपी रायपुर होते हुए ननकट्ठी पहुंचे थे और सुनसान जगह का चयन किया था।

पुलिस जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि आरोपियों का मुख्य उद्देश्य एटीएम से नगदी चोरी कर आर्थिक लाभ कमाना था। पुलिस ने उनके पास से चोरी में इस्तेमाल मेटाडोर, रस्सी और अन्य उपकरण जब्त किए हैं। आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड भी लंबा है और उनके खिलाफ मध्यप्रदेश व उत्तर प्रदेश के विभिन्न थानों में चोरी, संगठित अपराध और मादक पदार्थ से जुड़े कई मामले पहले से दर्ज हैं।

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