छत्तीसगढ़ में बिजली उत्पादन दोगुना करने की तैयारी, 32,100 मेगावाट नई क्षमता के लिए 3.4 लाख करोड़ का MoU

छत्तीसगढ़ में बिजली उत्पादन दोगुना करने की तैयारी, 32,100 मेगावाट नई क्षमता के लिए 3.4 लाख करोड़ का MoU

Chhattisgarh Energy Project छत्तीसगढ़ सरकार के ऊर्जा विभाग ने राज्य में विद्युत उत्पादन क्षमता को दोगुना से अधिक करने और पारेषण व वितरण अवसंरचना को सशक्त बनाने की व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी, छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी और छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के माध्यम से उत्पादन, पारेषण और वितरण तीनों क्षेत्रों में बड़े निवेश और विस्तार की रूपरेखा पर काम किया जा रहा है।

राज्य में वर्तमान स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता 30,671.7 मेगावाट है, जिसमें 28,824 मेगावाट ताप विद्युत, 220 मेगावाट जल विद्युत तथा 2,047 मेगावाट सौर, बायोमास सहित अन्य नवीकरणीय स्रोत शामिल हैं। आने वाले वर्षों में 32,100 मेगावाट अतिरिक्त क्षमता स्थापित करने की दिशा में एमओयू किए गए हैं। इनमें 12,100 मेगावाट ताप विद्युत, 4,200 मेगावाट न्यूक्लियर, 2,500 मेगावाट सौर तथा 13,300 मेगावाट पंप स्टोरेज परियोजनाएं शामिल हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से लगभग 3.4 लाख करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है।

पंप स्टोरेज आधारित जल विद्युत परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने वर्ष 2023 में नई नीति लागू की है। इसके तहत 8,300 मेगावाट क्षमता के छह स्थलों की पहचान की गई है, जिनमें से पांच की व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार हो चुकी है। निजी क्षेत्र में भी लगभग 5,000 मेगावाट क्षमता की परियोजनाओं पर कार्य प्रगति पर है। साथ ही एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के साथ संयुक्त उपक्रम बनाकर लगभग 2,000 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं विकसित करने की योजना है।

कोरबा पश्चिम में 660-660 मेगावाट की दो सुपर क्रिटिकल ताप विद्युत इकाइयों तथा मरवाही क्षेत्र में 800 मेगावाट की एक नई इकाई स्थापित करने की प्रक्रिया जारी है। इसके अलावा 500 मेगावाट-घंटा बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS), 6 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर तथा 32 मेगावाट सौर परियोजनाओं की स्थापना भी प्रस्तावित है।

पारेषण क्षेत्र में पिछले दो वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। जनवरी 2026 तक उपकेंद्रों की संख्या 26 से बढ़कर 137 हो गई है। ट्रांसफॉर्मरों की संख्या 61 से बढ़कर 371 पहुंच गई है तथा कुल ट्रांसफॉर्मिंग क्षमता 3,552 एमवीए से बढ़कर 27,883 एमवीए हो गई है। पारेषण लाइनों की लंबाई 4,845 सर्किट किमी से बढ़कर 14,730 सर्किट किमी हो चुकी है। 5,200 किमी ऑप्टिकल फाइबर ग्राउंड वायर बिछाकर 131 उपकेंद्रों को जोड़ा गया है।

आगामी तीन वर्षों में 400/220 केवी, 220/132 केवी और 132/33 केवी के कुल 41 नए उच्च दाब उपकेंद्र स्थापित किए जाएंगे। राजधानी रायपुर और न्यायधानी बिलासपुर में ओवरहेड बिजली लाइनों को भूमिगत केबल में परिवर्तित करने की योजना है, जिस पर क्रमशः 7,600 करोड़ और 3,100 करोड़ रुपये व्यय का अनुमान है। वर्ष 2027-28 तक 2,000 मेगावाट-घंटा क्षमता का बैटरी स्टोरेज सिस्टम स्थापित करने का लक्ष्य है।

वितरण क्षेत्र में भी व्यापक विस्तार हुआ है। जनवरी 2026 तक कुल उपभोक्ताओं की संख्या 65 लाख से अधिक हो गई है। अधिकतम मांग 1,334 मेगावाट से बढ़कर 7,003 मेगावाट तक पहुंच चुकी है। ग्रामीण विद्युतीकरण के तहत 18,778 गांवों को ग्रिड से जोड़ा जा चुका है। 33 केवी और 11 केवी लाइनों की लंबाई में भी हजारों किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है।

प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत 1.32 लाख से अधिक पंजीयन हो चुके हैं, जिनमें 27 हजार से अधिक संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। पीएम कुसुम योजना के तहत सौर पंपों की स्थापना जारी है। स्मार्ट मीटरिंग के अंतर्गत 57.26 लाख उपभोक्ताओं में से 59 प्रतिशत से अधिक पर स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जबकि 11 केवी फीडरों पर 100 प्रतिशत स्मार्ट मीटरिंग पूर्ण हो चुकी है।

इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जन-अभियान के तहत घरेलू उपभोक्ताओं को 400 यूनिट तक की खपत पर पहले 200 यूनिट में 50 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है। किसानों के लिए डॉ. खूबचंद बघेल किसान विद्युत सहायता योजना के माध्यम से रियायती एवं निःशुल्क बिजली उपलब्ध कराई जा रही है।

सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ को आने वाले वर्षों में देश की ऊर्जा राजधानी के रूप में स्थापित करना है, जिसके लिए उत्पादन, पारेषण और वितरण के समन्वित विकास पर तेजी से कार्य किया जा रहा है।

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