CG Hindi Latest News: रायपुर। राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड औषधीय पौधों के संरक्षण, संवर्धन, खेती, विपणन और अनुसंधान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कार्यरत है। यह बोर्ड गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री उपलब्ध कराने, किसानों को सब्सिडी देने और औषधीय क्षेत्र के विकास के लिए नीतियां लागू करने में अहम भूमिका निभाता है।
छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम ने धमतरी जिले में बोर्ड के सहयोग से संचालित विभिन्न योजनाओं का स्थल निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशानुरूप और वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में राज्य को विजन 2047 के तहत भारत का “हर्बल ग्रोथ इंजन” बनाने की दिशा में मिशन मोड में कार्य किया जा रहा है।
किसानों और महिला समूहों से की चर्चा
निरीक्षण के दौरान अध्यक्ष मरकाम ने नदियों के किनारे खस की खेती, लेमनग्रास और ब्राम्ही उत्पादन, बाड़ी योजना के अंतर्गत सिंदूरी पौधारोपण सहित अन्य गतिविधियों की समीक्षा की। उन्होंने औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती कर रहे किसानों और महिला स्व-सहायता समूहों से खेतों में पहुंचकर बातचीत की और शासन से मिलने वाली सहायता की जानकारी ली।
महिलाओं और किसानों ने बताया कि अब छत्तीसगढ़ में औषधीय खेती से उन्हें सम्मान के साथ बेहतर आय भी मिल रही है।
नवाचार मॉडलों से बढ़ रही आय
अध्यक्ष मरकाम ने बताया कि पिछले दो वर्षों में बोर्ड ने कई नवाचार मॉडल शुरू किए हैं। इनमें बाड़ी औषधीय पौधारोपण के माध्यम से महिला सशक्तिकरण, पंचायतों की खाली भूमि पर स्व-सहायता समूहों द्वारा औषधीय खेती (कन्वर्जेन्स मॉडल), कस्टम फार्मिंग मॉडल के तहत निजी निवेशकों के सहयोग से खेती, पैडी डायवर्सन मॉडल के जरिए धान की जगह वच और ब्राम्ही जैसी लाभकारी फसलों का उत्पादन, नदियों के किनारे अनुपयोगी भूमि पर खस जैसी सुगंधित फसलों की खेती तथा ग्रामीण चारागाह भूमि को प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित करना शामिल है।
उन्होंने कहा कि इन योजनाओं से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है और राज्य जल्द ही किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर है।
फील्ड विजिट के दौरान बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जे.ए.सी.एस. राव भी उपस्थित रहे। उन्होंने आश्वस्त किया कि बोर्ड आने वाले समय में और अधिक गति और प्रभाव के साथ कार्य करेगा।

