Chhattisgarh News रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दुर्ग में आयोजित छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग विकास प्राधिकरण की बैठक में विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) ‘जीरामजी’ को ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक महत्वपूर्ण और परिवर्तनकारी योजना बताया। उन्होंने कहा कि यह योजना ग्रामीण परिवारों को रोजगार और आजीविका के नए अवसर उपलब्ध कराकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाएगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि भारत सरकार द्वारा शुरू की गई यह नई ग्रामीण रोजगार योजना मनरेगा के स्थान पर लागू की गई है, जिसमें कई नए और लाभकारी प्रावधान जोड़े गए हैं। योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को अब साल में 125 दिनों का रोजगार मिलेगा, जो पहले 100 दिन था। काम उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान किया गया है। साथ ही मजदूरी का भुगतान एक सप्ताह के भीतर सुनिश्चित किया जाएगा और यदि 15 दिनों के अंदर भुगतान नहीं होता है तो 0.05 प्रतिशत की दर से ब्याज भी दिया जाएगा। योजना की तैयारी और क्रियान्वयन की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों को सौंपी गई है।
भारत सरकार ने इस योजना के लिए वर्ष 2026-27 में 95,692.31 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है, जो पूर्व में मनरेगा के लिए निर्धारित 88,000 करोड़ रुपये से अधिक है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से जरूरतमंद लोगों को उनके गांव में ही रोजगार मिलेगा और पलायन पर भी रोक लगेगी।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री साय की उपस्थिति में राज्य में निवेश और तकनीकी विकास को बढ़ावा देने के लिए 40 आईटी कंपनियों के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इसके अलावा उन्होंने यस चिट फंड कंपनी के निवेशकों को राहत देते हुए चेक वितरण किया। इस अवसर पर कुल 4,601 निवेशकों को 7 करोड़ 38 लाख 24 हजार 100 रुपये की राशि वापस सौंपी गई।
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