29 जनवरी 2026 को जो सोना 1 लाख 69 हजार के पार हो गया था, चांदी जिसकी कीमत 4 लाख 20 हजार के आंकड़े को छू गई थी दो दिन में दोनों की भरभराकर गिर गए हैं. 1 फरवरी को सोने की कीमत 1 लाख 38 हजार के करीब पहुंच गया है.वहीं चांदी की कीमत गिरकर 2.26 लाख रुपये पर पहुंच गई है. सोने की कीमत में सिर्फ दो दिनों के भीतर 31000 रुपये तो चांदी में 1.38 लाख रुपये का भारी भरकम 2.65 लाख रुपये पर पहुंच गई. 2 फरवरी को भी सोने-चांदी में उठा पटक जारी रही. MCX पर दोनों की कीमतों कभी बढती तो अगले ही पल नीचे खिसक रही है.
2 फरवरी को सोने-चांदी की कीमत
अमेरिकी फेरडल रिजर्व की संभावित सख्त नीतियों की आशंका ने सोने-चांदी दोनों में दवाब को बढ़ा दिया है. डॉलर की मजबूती के चलते निवेशक बॉन्ड में निवेश बढ़ा रहे हैं, जिसके चलते सोना आज फिर से गिर रहा है. सोमवार को कारोहार में स्पॉट रेट्स 4 फीसदी गिर गई तो चांदी 12 फीसदी तक गिर गई. दरअसल आज मार्केट खुलने के साथ ही डॉलर इंडेक्स 1 फीसदी चढ़कर 97.22 पर पहुंच गया. डॉलर की तेजी के तलते दोनों ही धातुओं में फिर से गिरावट आई और जो रिकवरी थी वो फिसल गई. निवेशकों को डर है कि अगर केविन वॉश फेडरल रिजर्व के चीफ बनते हैं तो वो मैद्रिक नीतियां सख्त होगी, जो डॉलर को बल देगा.
सोने-चांदी की कीमत में गिरावट की वजह
डॉलर में मजबूती के चलते निवेशक सोने से पैसा निकालकर अमेरिकी बॉन्ड में लगा रहे हैं. केविन वॉश सख्त नीतियों के मानने वाले हैं. ऐसे में इस बात की आशंका है कि फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में जल्द कोई बड़ी कटौती नहीं होदी और लंबे समय तक ब्याज दर ऊंचे रह सकते हैं, जिसने डॉलर को मजबूती दी है. ऐसे में सोने-चांदी में बिकवाली रहने की उम्मीद है. हालांकि हालिया गिरावट मुनाफावसूली का नतीजा है. सोने-चांदी की हाई कीमतों के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी.
आज 10 ग्राम सोने और 1 किलो चांदी का रेट
2 फरवरी 2026 को सोने-चांदी में शुरुआती रिकवरी के बाद फिर से गिरावट दर्ज की गई. 24 कैरेट वाले सोने की कीमत आज 160860 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया तो वहीं 22 कैरेट वाले सोने की कीमत 147480 रुपये प्रति 10 ग्राम पर रहा. चांदी की बाद करें तो 1 किलो चांदी की कीमत आज 367000 रुपये पर पहुंच गई है. 31 जनवरी को चांदी 411900 रुपये पर पहुंच गई थी.
क्या और गिरेंगे सोने-चांदी के रेट
सोने-चांदी की कीमत में ये गिरावट करेक्शन यानी तकनीकी सुधार और निवेशकों की ओर से की जा रही मुनाफावसूली का नतीजा है.इसके बाद कीमतों में कुछ सुधार हो सकती है और वे स्थिर हो सकती हैं. बाजार जानकार मानते हैं कि ये गिरावट शॉर्ट टर्म दवाब का नतीजा है. जब तक डॉलर में गिरावट नहीं आती और वैश्विक अनिश्चितता नहीं बढ़ती, तब तक सोना-चांदी में तेज रिकवरी की संभावना सीमित रह सकती है. हालांकि जानकार ये भी मानते हैं कि अमेरिका की ओर से जिस तरह से अलग-अलग देशों पर धौंस दिखाने की नीतियां जारी है, ग्लोबल टेंशन कम नहीं होगा और सोने-चांदी की डिमांड हाई पर बनी रहेगी.

