Chhattisgarh Durg News: दुर्ग। छत्तीसगढ़ शासन के कड़े नियमों के बावजूद दुर्ग जिले में खाद्य विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। नियम कहते हैं कि आगामी माह का राशन हर हाल में पिछली तारीख की 31 तारीख तक उचित मूल्य की दुकानों (PDS) में पहुंच जाना चाहिए, लेकिन फरवरी माह का आवंटन अब तक न पहुंचने से जिले के गरीब हितग्राहियों की चिंता बढ़ गई है।
प्रमुख बिंदु: सरकारी तंत्र की विफलता या उदासीनता?
नियमों की अनदेखी: शासन के निर्देशानुसार 31 जनवरी तक फरवरी माह का चावल दुकानों में भंडारित हो जाना चाहिए था। आज समय सीमा बीत जाने के बाद भी एक भी दुकान में चावल नहीं पहुंचा है।
खाली पड़े गोदाम: जमीनी हकीकत यह है कि न केवल दुकानें, बल्कि दुर्ग और पाटन के मुख्य गोदाम भी पूरी तरह खाली पड़े हैं। वहां चावल का स्टॉक शून्य है।
हितग्राहियों की परेशानी: फरवरी का महीना शुरू होने को है, ऐसे में राशन कार्ड धारक दुकानों के चक्कर काटने को मजबूर होंगे। गरीब परिवारों के लिए यह स्थिति “थाली से निवाला छीनने” जैसी है।
प्रशासनिक नाकामी पर सवाल
यह स्थिति खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है:
क्या यह शासन की उदासीनता है या निचले स्तर पर सरकारी तंत्र की नाकामी?
समय पर आवंटन की प्रक्रिया पूरी क्यों नहीं की गई?
अगर गोदाम खाली हैं, तो समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
निष्कर्ष: यदि अगले 1-2 दिनों में युद्ध स्तर पर भंडारण नहीं किया गया, तो जिले की सार्वजनिक वितरण प्रणाली पूरी तरह चरमरा जाएगी और हजारों परिवारों को फरवरी महीने में दाने-दाने के लिए मोहताज होना पड़ सकता है

