संगम स्नान से रोके गए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, अपमान पर भड़के नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत, UP और केंद्र सरकार बोला तीखा हमला

संगम स्नान से रोके गए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, अपमान पर भड़के नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत, UP और केंद्र सरकार बोला तीखा हमला

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने प्रयागराज माघ मेले में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी के साथ पुलिस प्रशासन द्वारा किए गए दुर्व्यवहार को भारतीय संत परंपरा का अपमान और लोकतंत्र के लिए काला दिन बताया।

डॉ. महंत ने प्रेस बयान में कहा कि वह स्वयं कबीरपंथी हैं और संतों का स्थान हमारे संस्कारों में सर्वोपरि है। उन्होंने कहा, “साधु भूखा भाव का, धन का भूखा नाहिं।” लेकिन वर्तमान सरकार धन और बल के अहंकार में संतों के सत्कार को भूल गई है।

नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार केवल उन्हीं संतों को सम्मान देती है जो उनके राजनीतिक एजेंडे का समर्थन करते हैं, जबकि जो संत स्वतंत्र आवाज उठाते हैं, उन्हें अपमानित किया जाता है। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य जी को पालकी से संगम स्नान करने से रोकना सदियों पुरानी परंपराओं का उल्लंघन है।

डॉ. महंत ने स्पष्ट किया कि यह घटना सत्ता का अहंकार दर्शाती है और मांग की कि उत्तर प्रदेश प्रशासन और केंद्र सरकार इस शर्मनाक घटना के लिए तुरंत माफी मांगे। उन्होंने कहा कि सनातनी परंपराओं और संतों के सम्मान के साथ कोई समझौता स्वीकार्य नहीं होगा।

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