रायपुर, यशी राजे। छत्तीसगढ़ में चल रही एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस ने गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। मतदाता सूची में नाम जुड़वाने और करेक्शन को लेकर हो रही परेशानियों का हवाला देते हुए कांग्रेस ने दावा–आपत्ति की समय-सीमा बढ़ाने की मांग की है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि एसआईआर के तहत पूर्व निर्धारित शेड्यूल के अनुसार 22 जनवरी तक ही दावा–आपत्ति ली जानी है, जबकि इस प्रक्रिया में प्रदेशभर में करीब 27 लाख मतदाताओं के नाम सूची से काट दिए गए। इसके बावजूद अब तक केवल 1 लाख 82 हजार दावा–आपत्ति आवेदन ही जमा हो सके हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि करीब 19 लाख 13 हजार मतदाताओं को ‘शिफ्टेड’ बताकर मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि अधिकांश मतदाताओं तक बीएलओ पहुंचे ही नहीं। कई मतदाताओं को नोटिस तक नहीं मिला, जिससे वे समय पर आपत्ति दर्ज नहीं करा पा रहे हैं।
सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि अब जब दावा–आपत्ति की अंतिम तिथि में केवल तीन दिन शेष हैं, तब मतदाताओं को नाम जुड़वाने, करेक्शन कराने या नाम बचाए रखने के लिए बूथों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। स्थिति यह है कि कई बीएलओ को खुद यह जानकारी नहीं है कि ‘शिफ्टेड’ बताए गए मतदाता आखिर किस वार्ड या क्षेत्र में रह रहे हैं। मजबूरी में कुछ जगहों पर दीवारों पर नोटिस चस्पा किए जा रहे हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता ने यह भी कहा कि वर्तमान में प्रदेश में समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन की प्रक्रिया चल रही है। वहीं बिलासपुर, मुंगेली, जांजगीर-चांपा, जशपुर और बस्तर जैसे जिलों से बड़ी संख्या में लोग रोज़गार के लिए प्रदेश से बाहर गए हुए हैं। अकेले बस्तर संभाग में ही 600 से अधिक नक्सल प्रभावित गांव हैं, जहां के लोग वर्षों से तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में रह रहे हैं। ऐसे में इन मतदाताओं का एसआईआर पूरा होना अपने आप में बड़ा सवाल है।
सुरेंद्र वर्मा ने निर्वाचन आयोग के दावों को कागजी बताते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर हालात बेहद चिंताजनक हैं। यदि दावा–आपत्ति की समय-सीमा नहीं बढ़ाई गई, तो लाखों मतदाता अपने मताधिकार से वंचित हो सकते हैं।
कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग से मांग की है कि प्रभावित मतदाताओं के हित को ध्यान में रखते हुए दावा–आपत्ति की तिथि बढ़ाई जाए और वास्तविक स्थिति के अनुरूप निर्णय लिया जाए।
Read More : सिहावा-नगरी पहुंचे सहकारी बैंक अध्यक्ष-उपाध्यक्ष, धान खरीदी और बैंकिंग व्यवस्था पर की चर्चा

